यूपीएससी परीक्षा में लहराया बिहार की प्रतिभाओं का परचम, छात्र कई बार कर चुके हैं टॉप

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में बिहार की प्रतिभाओं का परचम लहराता रहा है। आज भी देश के लगभग राज्यों में बिहार के आईएएस और आईपीएस अधिकारी कार्यरत हैं। पिछले कई वर्षों से यूपीएससी में बिहार के छात्र टॉप नहीं कर रह पा रहे थे। इस सूखे को 20 वर्ष बाद कटिहार के शुभम कुमार ने खत्म किया है।

यूपीएससी की परीक्षा में बिहार के छात्र कई दफे टॉपर रहे हैं। वर्ष 1987 बैच के टॉपर आमिर सुबहानी अभी बिहार के विकास आयुक्त हैं। इसके अगले ही वर्ष यानी 1988 में पटना के ही रहनेवाले प्रशांत ने यूपीएससी की परीक्षा में टॉप किया था। हालांकि, उन्होंने बिहार की जगह पश्चिम बंगाल कैडर ले लिया। बाद में उन्होंने आईएएस की नौकरी छोड़ दी। अभी वह वर्ल्ड बैंक में कार्यरत हैं। इसके बाद बिहार को यूपीएससी में टॉपर के लिए 8 साल का इंतजार करना पड़ा। वर्ष 1996 में बिहार के ही सुनील कुमार बर्णवाल यूपीएससी में टॉपर बने। बाद में वह झारखंड कैडर में चले गए और अभी वहीं पदस्थापित हैं।

- 1987 बैच के टॉपर आमिर सुबहानी अभी हैं बिहार के विकास आयुक्त

- आमिर सुबहानी के बाद पटना के प्रशांत ने 1988 में किया था टॉप

- 1996 बैच के टॉपर सुनील कुमार बाद में चले गए झारखंड कैडर में

- 2000 के टॉपर आलोक झा ने विदेश सेवा में जाना चुना था

बेलारूस के राजदूत हैं आलोक झा

सुनील कुमार बर्णवाल के बाद आलोक झा साल 2000 में यूपीएससी की परीक्षा में टॉप पर रहे। बिहार के रहनेवाले आलोक झा ने आईएएस की नौकरी करने के बजाए भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) में योगदान किया। बताया जाता है कि वह अभी बेलारूस में भारत के राजदूत हैं। आलोक झा के बाद बिहार को यूपीएससी टॉपर के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ा। आखिरकार 20 साल बाद कटिहार के शुभम कुमार ने यूपीएसी में टॉप करने के साथ देश में एक बार फिर बिहार का परचम लहरा दिया।