॥ सच्चाई की छ्त ॥

झूठी दीवार पर सच्चाई की छ्त

बनाने की कभी कोशिश मत करना

झुठी बातों पे विश्वास की खत 

लिखने की जुर्रत मत करना


जो दीवार खड़ा ना हो पाता हो

उस पर भरोसा क्या करना

स्वंय जो बैशाखी पर टिका हुआ हो

औरों का सहारा क्या बनना


झूठा हर दिन झूठा होता है

सच्चाई की पुताई क्या करना

सच्चाई कभी छुप नहीं सकता है

फिर इन पर नकाब क्यों है चढ़ाना


हर युग में सच्चाई निकल बाहर आया है

झुठा की बड़ाई क्यों है करना

जो खुद सच्चा नहीं दिखता है

उस पर यकीन फिर क्यों है करना


सत्य परेशान हो सकता है

फिर पराजय की जय क्यों है करना

जो सच्चाई निडर सा दिखता है

उसको अंधेरों  में क्यों है छिपना


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088