कभी फूल कभी कांटे

तेरे लक्ष्य की राह की हर डगर

पर कुछ पडयंत्री फूल तो कुछ  

कांटें जरुर बिछाऐंगे।।


पहचान ना पाऐगा षडयंत्री फूल कांटों को तू ऐ मुसाफिर कभी गिर तो कभी संभल जाऐगा।।


भ्रमित होके लक्ष्ये राह से तू सुन

ना फूल चुन्ना, ना ही तू कांटें चुन्ना

तभी कामयाबी से हर मुकाम़ पाऐगा।।


ये दुनिया का काम है गिराना सुन

हौसलों पे अड़िंग रह कर ही तू सच्चे

फूलों की सुगंध सा महकाऐगा।।


खुद तो हसेगा, महकेगा तू संग दूजों

को खुशी दे नाम का अलख जगाऐगा।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र