फर्जी शिक्षक भर्ती करवा रहे गिरोह का पर्दाफाश


दो फर्जी प्राइमरी शिक्षक भी शामिल है। गिरोह ने 100 से अधिक शिक्षकों की भर्तियां कराई हैं। इसमें कुछ मामले पकड़ में जाये तो प्रयागराज स्थित परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से साठगांठ कर बचाने का भी प्रयास किया। एसटीएफ का दावा है कि इस फर्जीवाड़े में यह गिरोह करोड़ों कमा चुका है। गिरोह ने कई परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के लिये साल्वर भी मुहैया कराए हैं। इस फर्जीवाड़े में सरगना से प्रतियोगी परीक्षाओं का रिजल्ट तैयार करने वाली कम्पनी के कर्मचारियों की भी साठगांठ सामने आयी है। संजय दिल्ली स्थित डाटा सॉफ्ट कम्प्यूटर सर्विसेज प्रा. लि. में प्रोडक्शन मैनेजर हैं। रविन्द्र कुमार मूल रूप से आगरा का है। इनसे आठ मोबाइल, सात पेन ड्राइव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सत्यापन फार्म, टीजीटी परीक्षा से जुड़े 26 अभ्यर्थियों की सूची, मगध यूनिवर्सिटी के कई प्रमाण पत्र, छत्तीसगढ़ स्टेट ओपन स्कूल की रोल नम्बर लिस्ट और ढाई लाख रुपये बरामद हुए हैं। इनके बैंक में जमा 19 लाख रुपये भी सीज करा दिये गये हैं।

दो फर्जी शिक्षक ही नियुक्ति का ठेका ले रहे 
एसटीएफ के डिप्टी एसपी प्रमेश शुक्ला के मुताबिक सरगना राम निवास ने फर्जी दस्तावेजों से प्राइमरी शिक्षक की नौकरी करने वालों के नामों का खुलासा भी किया। इन लोगों ने बताया कि देवरिया में विनय तिवारी, कुशीनगर में मनीष यादव फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। राम निवास ने यह भी खुलासा किया कि विनय और मनीष ही अभ्यर्थियों को फर्जी दस्तावेजों से नौकरी दिलाने का ठेका लेते हैं।