हे गजानन!

करें प्रथम वंदन, स्नेह निमंत्रण,

कर स्वीकार मेरा नमन!

मिट जाएँ क्लेश समष्टि के,

हे गजानन ! है अभिनंदन !


सुख लंबोदर हों आएँ अब,

दुख लघु मूषक, कर हरण।

दीर्घ शुंड सी हो आयु, 

निरोगी हो हर एक तन।


धीर न खोएं  कभी हम,

हों मधुर मोदक से वचन।

 संकट पड़ा भारी धरा पर

हे दुखहर्ता विघ्न हरण !


आस और विश्वास तू ही,

भक्ति में नत शत नमन।

हर बार तेरी ही कृपा से 

होता  है विघ्न विसर्जन।


तरुणा पुण्डीर 'तरुनिल'

साकेत ,नई दिल्ली।