तुम आ गए

ठहरे जल की तरह थी मेरी जिंदगी,

इसमें हलचल मचाने जो तुम आ गए।

हो गई थी मैं बेसुध तुम्हें देख कर,  

मेरे दिल को लुभाने जो तुम आ गए।

ठहरे जल की तरह थी मेरी जिंदगी,

साथ पाना तेरा ,मेरी चाहत बनी,

प्रेम की लौ जलाने जो तुम आ गए।

आस बढ़ने लगी,चाह जगने लगी,

मुझको अपना बनाने जो तुम आ गए।

ठहरे जल की तरह थी मेरी जिंदगी,

बाँह खोले खड़ी थी डगर में तेरी,

अपनी बाहों में लेने जो तुम आ गए,

तुमको पाकर सिहरने लगा मन- बदन,

रूह को थरथराने जो तुम आ गए।

ठहरे जल की तरह थी मेरी जिंदगी,

दिल मचलने लगा मन चहकने लगा,

सांस थमने लगी तन महकने लगा,

ऐसा लगने लगा ज़िन्दगी मिल गई

गाने दिल के तराने जो तुम आ गए।

ठहरे जल की तरह थी मेरी जिंदगी,


मंजु कौशिक,वरिष्ठ कवयित्री 

गाजियाबाद-उत्तर प्रदेश 

9899066470