वैक्सीन गार्डेसिल-9 बीमारी के भार एवं कैंसर को कम करने में करेगी मदद

लखनऊ। भारतीय लड़कियों, महिलाओं एवं लड़कों में एचपीवी से संबंधित बीमारी का भार कम करने में मदद करने के लिए भारत की पहली जेंडर न्यूट्रल ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन भारत में सेहतमंद युवा जनसंख्या में योगदान देने के अपने प्रयास में एमएसडी फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने भारत की पहली जेंडर न्यूट्रल एचपीवी वैक्सीन गार्डेसिल 9 के लॉन्च की घोषणा की। 9-वैलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस (टाईप 6, 11, 16, 18, 31, 33, 45, 52, और 58) वैक्सीन भारतीय लड़कियों एवं महिलाओं (9 से 26 साल) एवं भारतीय लड़कों (9 से 15 साल) के बीच वैक्सीन में मौजूद एचपीवी टाईप्स के कारण होने वाली बीमारी के भार एवं कैंसर को कम करने में मदद करेगी। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या विभाग के वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्सः 2015 रिवीजन’ जनसंख्या डेटाबेस के अनुसार भारत में 10 साल से 24 साल की उम्र वर्ग के 229 मिलियन लोग हैं, जो दुनिया में सर्वाधिक है। भारत में दुनिया की कुल जनसंख्या के लगभग 20 प्रतिशत लोग रहते हैं और यह 2030 तक दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक होगा। इस सेगमेंट की प्राथमिकता स्वास्थ्य व बीमारी की रोकथाम हैं। एचपीवी वैक्सीनेशन भारत में एचपीवी से संबंधित कैंसर (महिला व पुरुषों में) का भार कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिसके सालाना लगभग 1.7 लाख मामले दर्ज होते हैं । मौजूदा अनुमान प्रदर्शित करते हैं कि हर साल लगभग 96,922 महिलाओं में सर्वाईकल कैंसर पाया जाता है और लगभग 60,078 महिलाएं इस बीमारी के कारण मौत का शिकार हो जाती हैं। सर्वाईकल कैंसर भारत में महिलाओं को होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है और 15 से 44 साल की महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे ज्यादा आम कैंसर है। हमारे देश में युवा लड़कों, लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रिवेंटिव हैल्थकेयर के तहत एचपीवी वैक्सीनेशन के बारे में जागरुकता बढ़ाने की जरूरत की पुष्टि करते हुए रेहान ए. खान, मैनेजिंग डायरेक्टर, एमएसडी- भारत क्षेत्र ने कहा, ‘‘गार्डेसिल 9 का लॉन्च एक सेहतमंद युवा भारत के निर्माण के मिशन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह देश में एचपीवी से संबंधित कैंसर एवं बीमारी के भार को कम करेगा। एचपीवी दोनों लिंग के लोगों को प्रभावित करता है, इसलिए गार्डेसिल 9 हमारे देश में एक जेंडर न्यूट्रल एचपीवी वैक्सीन प्रस्तुत करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करती है। यह वैक्सीन भारतीय लड़कियों, महिलाओं और लड़कों में एचपीवी से संबंधित बीमारियों को संबोधित करती है और भारत में प्रिवेंटिव हैल्थकेयर को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। हमारा विश्वास है कि नौजवान लड़कों व लड़कियों के माता-पिता के बीच जागरुकता बढ़ाना भारत में एचपीवी बीमारी के भार को संबोधित करने के लिए महत्वपूर्ण है। हम प्रगतिशील, स्वस्थ एवं युवा भारत में स्वास्थ्य व सेहत के सर्वोच्च मानक तक पहुंचने का सफर शुरू कर चुके हैं। डॉ. विजय यवले, डॉ. यवले मल्टीस्पेशियल्टी हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रन एवं पूर्व प्रेसिडेंट, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने कहा, ‘‘एचपीवी महिला और पुरुषों के बीच भेदभाव नहीं करती। सामान्य तौर से वैक्सीन लड़कों व लड़कियों, दोनों को लगाई जाने लगी है। आज लगभग 25 देश दोनों लिंग के लोगों को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए जेंडर न्यूट्रल वैक्सीन प्रोग्राम की अनुशंसा करते हैं। एचपीवी-जेंडर न्यूट्रल वैक्सीनेशन द्वारा एचपीवी के प्रसार में ज्यादा तेजी से कमी लाई जा सकती है और वैक्सीनेशन के कवरेज में अस्थायी गिरावट के प्रति ज्यादा दृढ़ता विकसित की जा सकती है। जेंडर न्यूट्रल एचपीवी वैक्सीन का अपार महत्व एचपीवी से संबंधित कैंसर एवं बीमारी के भार को कम करने की ‘साझा जिम्मेदारी’ प्रतिबिंबित करता है और यह हमारे देश में नौजवान लड़कियों एवं लड़कों की सेहतमंद जनसंख्या का निर्माण करने की ओर एक प्रगतिशील कदम है। एचपीवी से लड़ने में नई लॉन्च की गई गार्डेसिल 9 के असरकारक होने के बारे में डॉ. हेमा दिवाकर, पूर्व अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ ऑब्सटीट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज ऑफ इंडिया ने कहा विश्व में एचपीवी बीमारी के अधिकांश भार में 9 एचपीवी सेरोटाईप का योगदान होता है। इनमें से कुछ भारत में ज्यादा पाए जाते हैं। भारत में सर्वाईकल कैंसर के 98.3 प्रतिशत मामलों, वुल्वर कैंसर के 95 प्रतिशत मामलों, वैजाइनल कैंसर के 77 प्रतिशत मामलों और गुदा के कैंसर के 70 प्रतिशत मामलों का कारण 7 एचपीवी सेरोटाईप्स होते हैं। हम एक बार फिर से दृढ़ संकल्पित हैं कि 9-वैलेंट एचपीवी वैक्सीन आ जाने के बाद, हम इसका इस्तेमाल भारत में करेंगे, क्योंकि यह बहुत असरदार है और एचपीवी सेरोटाईप्स 31, 33, 45, 52, 58 के खिलाफ प्रति प्रोटोकॉल असरकारक आबादी में असर करती है।’’ विश्व में एचपीवी बीमारी का अधिकांश भार 9 एचपीवी सेरोटाईप्स के कारण है। उनमें से कुछ भारत में और ज्यादा फैले हुए हैं। उदाहरण के लिए, भारत में सर्वाईकल कैंसर के 98.3 प्रतिशत मामलों, वुल्वर कैंसर के 95 प्रतिशत मामलों, वैजाइनल कैंसर के 77 प्रतिशत मामलों और गुदा के कैंसर के 70 प्रतिशत मामलों का कारण 7 एचपीवी सेरोटाईप्स हो सकते हैं । गार्डेसिल 9-वैलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस यूएसएफडीए से अनुमोदित एकमात्र वैक्सीन है, जो अमेरिका में पहली बार सन 2015 में लॉन्च की गई और यह दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में इससे भी पहले अनुमोदित की जा चुकी है। यह वैक्सीन एचपीवी के 9 टाईप्स (टाईप 6, 11, 16, 18, 31, 33, 45, 52, और 58) से सुरक्षा देती है। यह वैक्सीन महिलाओं में सर्वाईकल कैंसर, वुल्वर कैंसर, वैजाईनल कैंसर, और गुदा के कैंसर के भार को कम करती है। यह जन स्वास्थ्य की समस्या के रूप में सर्वाईकल कैंसर का विश्व से उन्मूलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एचपीवी से संबंधित कैंसर और बीमारियां पुरुषों को भी प्रभावित कर सकती हैं। गार्डेसिल 9-वैलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन लड़कों (9 से 15 साल के) को जेनिटल वार्ट्स, एनाल इंट्राएपिथियिल नियोप्लेसिया, एनाल कैंसर एवं प्रिकैंसेरस या डिसप्लास्टिक घाव की रोकथाम के लिए अनुशंसित की गई है।