महिलाओं को होने वाले 3 कैंसर, इनसे बचना जरूरी और ये संकेत ही सबसे बड़ा बचाव

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनकर ही व्यक्ति जीने की इच्छा छोड़ देता है। इस बीमारी के बढ़ने का एक मुख्य कारण हमारा बिगड़ता लाइफस्टाइल है। ऐसी बीमारी जो किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की एक स्टडी के मुताबिक, रोज लगभग 1300 लोग कैंसर की वजह से मरते हैं। इनमें से कुछ कैंसर हैं जो सिर्फ औरतों को ही प्रभावित करते हैं आज हम उन्हीं कैंसर के बारे में आपके बताएंगे और साथ ही में उनसे बचने का तरीका और इलाज भी आपको बताएंगे।

सबसे पहले है ब्रेस्ट कैंसर

वैसे यह कैसे पुरुषों को भी होता है लेकिन महिलाओं को ये ज्यादा होता है क्योंकि उनकी छाती पर टिशू ज्यादा होते हैं। इसलिए कैंसर पनपने की संभावना ज्यादा हो जाती हैं। इसलिए महिलाओं को इस ओर ज्यादा जागरूक होना जरूरी होता है

लक्षणों की बात करें तो...

स्तनों के आस-पास गांठ हो, स्तनों में दर्द, या फिर काफी जलन हो रही हो दृ निप्पल से डिस्चार्ज, स्तनों के आकार में बदलाव, निप्पल आगे से मुड़े होना हो तो डाक्टरी जांच तुरंत करवाना जरूरी है क्योंकि समय रहते अगर इन संकेतों को पकड़ लिया जाए तो बीमारी को कंट्रोल कर लिया जाता है और यहीं सबसे बड़ा बचाव है कि आप किसी तरह की लापरवाही ना बरतें।

अब इलाज जानिए...

जरूरी नहीं कि सिर्फ सर्जरी ही इस कैंसर का इलाज हो। डॉक्टर्स कैंसर की जगह, और उसके प्रकार के आधार पर ट्रीटमेंट का तरीका बताते हैं। अगर सर्जरी ही इसका इलाज बताया जाए तो ट्यूमर को सर्जरी की मदद से हटा दिया जाता है। अगर ट्यूमर ऐसी जगह है जहां ऑपरेशन नहीं हो सकता तो उसे इनऑपरेबल कहा जाता है यानी जिसका ऑपरेशन नहीं हो सकता। ऐसे मामलों में डॉक्टर दूसरे तरीकों से इलाज करने की कोशिश करते हैं जैसे रेडियेशन, कीमोथेरपी वगैरह।

सर्वाइकल कैंसर यानि बच्चेदानी के मुंह का कैंसर

मेडिकल साइंस में इसे गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर कहा जाता है। सर्विक्स यानी बच्चेदानी का मुंह वो जगह है जहां से बच्चा बाहर आता है। यहां पर कैंसर हो जाए तो बचना मुश्किल होता है।

पेडू यानी पेल्विस में दर्द रहना, 

सेक्स के समय दर्द होना,

वजाइना से सफेद डिस्चार्ज होना और दुर्गंध आना 

पीरियड ना होते हुए भी खून आना

पीरियड का अनियमित होना

काफी ज्यादा खून जाना,

वजन गिरना,

उलटी जैसा महसूस होना,

 बाथरूम जाने की आदतों टाइम में बदलाव.

यह सब इस कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। 

बचावः इस कैंसर से बचने का उपाय एक वैक्सीन है। एच पी वी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की वैक्सीन। जिसे 9 साल की उम्र के बाद कभी भी लगवा सकते हैं। इस बारे में डाक्टरी सलाह जरूर लें और उनसे पूछें। सबसे सही उम्र है 16 से 18 के बीच। लेकिन उसके बाद भी लगवा सकते हैं। इससे बचने के लिए 21 साल की उम्र के बाद हर साल पैप स्मीयर टेस्ट कराना चाहिए। जिसमें यह आसानी से पता चलता है कि सर्विक्स में कैंसर सेल तो नहीं बन रहे. अगर ऐसा हो रहा होता है तो बच्चेदानी निकाल दी जाती है। ये सबसे ज्यादा सफल होने वाला तरीका होता है।

इलाजः ट्रीटमेंट में अधिकतर वही तरीके अपनाए जाते हैं जो किसी भी कैंसर के लिए इस्तेमाल होते हैं. अगर कैंसर बढ़ गया है तो बच्चेदानी निकाल दी जाती है, उससे भी फायदा नहीं हो तो कीमोथेरपी और रेडियेशन से इलाज किया जाता है।

ओवेरियन कैंसर यानि गर्भाश्य का कैंसर

गर्भाशय में  जहां बच्चा पलता है और उससे अंडाशय भी जुड़े होते हैं। यहीं औरत का शरीर अंडाणु होता है जिनमें से हर महीने अंडाणु निकलते हैं, और स्पर्म से मिलकर फिर बच्चा बनता है। इन्हीं अंडाशयों में होने वाले कैंसर को ओवेरियन कैंसर या अंडाशय का कैंसर कहा जाता है।

जब यहां कैंसर सेल्स बनते हैं तो 

पेट के निचले हिस्से में सूजन या दर्द रहता है

वजन घटना, बार बार यूरिन पास होता है

पेडू वाले हिस्से में परेशानी महसूस होना।

गर्भाशय के दोनों तरफ ओवरी होती हैं जिन्हें अंडाशय कहा जाता है

कई बार इनमें गांठें पड़ जाती हैं जिनको सिस्ट कहा जाता है।

बचावः बचाव का सबसे बेस्ट तरीका है कि आप अपनी समय पर जांच करवाते रहे। खासकर जब आपकी उम्र पचास से ज्यादा हो जाए। अगर परिवार में किसी को पहले ही ओवेरियन कैंसर हो चुका है तो ज्यादा सावधानी बरतें।

इलाजः इस कैंसर के इलाज के लिए भी सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियेशन का सहारा लिया जा सकता है जो डॉक्टर अच्छी तरह से जांच-परख कर जरुरत के हिसाब से बताएंगे कि कौन सा तरीका बेहतर होगा। 

यह तीन कैंसर तो थे जो मुख्य रुप से महिला को प्रभावित करते हैं। लेकिन कुछ कैंसर ऐसे भी हैं जो महिला हो या पुरुष दोनों को ही प्रभावित करते हैं। जैसे फेफड़ों, हड्डियों, मुंह या स्किन का कैंसर। आपके शरीर में कोई भी ऐसा बदलाव दिखे या दर्द हो तो बिना देरी डाक्टरी संपर्क करें। क्योंकि बचाव ही इससे बचने का सबसे पहला उपाय है। अपने खान-पान को हैल्दी रखें। योग करें सैर करें और मेडिटेशन का सहारा लें। जितना हो सकें खुद को प्रदूषण से बचाएं। स्वच्छ पानी का सेवन करें।