विश्व बौद्धिक संपदा संगठन - वैश्विक नवाचार सूचकांक 2021 में भारत की बल्ले-बल्ले - रैंकिंग सूची में भारत की स्थिति मजबूत

वैश्विक नवाचार सूचकांक रैकिंग के आधार पर दुनिया भर की सरकारें अपने देशों में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का आंकलन करती है - एड किशन भावनानी

गोंदिया - वैश्विक रूप से भारत का बौद्धिक संपदा का लोहा हमेशा सर्वोपरि पर रहा है, यही कारण है कि बड़े-बड़े विकसित देशों में प्रोफेशनल भारतवंशियों की मांग हर क्षेत्र में सतत् रही है। चाहे वह मेडिकल, प्रौद्योगिकी, तकनीकी या किसी अन्य कार्य के लिए भारतीयों को अपेक्षाकृत अधिक प्राथमिकता मिलती है।...साथियों यही कारण है कि आज अमेरिका जैसे पूर्ण विकसित राष्ट्र में डॉक्टर इंजीनियर अनेकों बौद्धिक संपदाधारी नवयुवक वहां उच्च सेवाएं दे रहे हैं।...साथियों बात अगर हम दिनांक 20 सितंबर 2021 को घोषित विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के वैश्विक नवाचार सूचकांक 2021 की करें तोभारत की शानदार 46वीं रैंकिंग हुई है जो 2015 में 81 रैंकिंग थी और 2020 में 48 वीं रेकिंग थी...। साथियों बात अगर हम इस वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई ) 2021 की करें तो इसको विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्लूआईटीओ) द्वारा लांच किया गया है जो संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी हैं। जीआईआई का उद्देश्य विश्व की 132 अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में नवाचार रैंकिंग और समृद्ध विश्लेषण के बहु- आयामी पहलुओं पर पकड़ को मज़बूत करना है। साझेदारी-इसे पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट और अन्य कॉर्पोरेट भागीदारों के साथ साझेदारी में प्रकाशित किया गया है, इसमें शामिल हैं - ब्राज़ीलियाई नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री, भारतीय उद्योगपरिसंघ,इकोपेट्रोल (कोलंबिया) और तुर्किश एक्सपोर्टर एसेंबली। सूचकांक विश्व अर्थव्यवस्थाओं को उनकी नवाचार क्षमताओं के अनुसार रैंक प्रदान करता है, जिसमें लगभग 80 संकेतक शामिल होते हैं तथा इन्हें इनोवेशन  इनपुट और आउटपुट में समूहीकृत किया जाता है। इनोवेशनइनपुट - संस्थान, मानव पूंजी और अनुसंधान, आधारभूत संरचना, बाज़ार कृत्रिमता, व्यावसायिक विशेषज्ञता। इनोवेशन आउटपुट - ज्ञान और प्रौद्योगिकी रचनात्मकता। साथियों किसी भी कल्याणकारी राज्य में योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना सरकार का काम है, किंतु उन पर अमल करते हुए उसे सफलता की ओर ले जाना निश्चित ही वहां के नागरिकों के श्रम, उनकी प्लानिंग और अपने लक्ष्य के लिए सतत उसकी पूर्ति में लगे रहने पर निर्भर करता है। भारत के लिए यह अच्छी खबर है कि वह वैश्विक नवाचारों में अपनी रैंकिंग निरंतर सुधार रहा है...। साथियों बात अगर हम भारत के इस सूचकांक में भारी सफ़लता की करें तो, भारत पिछले कई वर्षों से वैश्‍विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) की रैंकिंग में लगातार सुधार कर रहा है। विशाल ज्ञान पूंजी, जीवंत स्टार्ट-अप ईकोसिस्टम और सार्वजनिक तथा निजी अनुसंधान संगठनों द्वारा किए गए अद्भुत काम के कारण ही इस जीआईआई रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। देश में परमाणु ऊर्जा विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और अंतरिक्ष विभाग जैसे वैज्ञानिक विभागों ने राष्ट्रीय नवाचार ईकोसिस्टम को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।...साथियों बात अगर हम भारत की स्थिति की करें तो, जनसंख्‍या में छोटे और क्षेत्रफल एवं संसाधन में बड़े देशों का अभी स्‍वभाविक है भारत से आगे रहना। इसके बाद भी यदि भारत हर क्षेत्र में लगातार सुधार करते हुए आगे बढ़ता दिख रहा है तो यह मान लेना चाहिए कि भारतीयों में निरंतर आगे बढ़ने की ललक पैदा हो गई हैसंसाधनों के अभाव में सतत भारतीय जन विकल्‍पों की तलाश कर रहा है, नवाचारों का स्‍वागत कर रहा है और सहज ही उन्‍हें अपना भी रहा है। वह नितरोज नए प्रतिमान गढ़ रहा है। अब वह रुकने वाला नहीं है।...साथियों बात अगर हम पिछले वर्ष 2020 की शुरुआत से अभी 2021 तक कोरोना महामारी से पैदा हुई अभूतपूर्व संकट कीस्थिति की करें तो हमने उसमें भी कामयाबी हासिल की है और वैक्सीनेशन में रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं जिसमें एक दिन में 2.25 करोड़ डोज़ से अधिक डोज़ लगाना वैश्विक रिकॉर्ड है और हम कोविड महामारी के कारण पैदा हुए अभूतपूर्व संकट के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई में कुल मिलाकर नवाचार सबसे आगे रहा है और यह देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। ऐसे ही अन्‍य कई क्षेत्र हैं जिनमें कल तक उस क्षेत्र को लेकर देश भर में ना कोई व्‍यापक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर था और ना ही उसके लिए कोई दिशा तय थी, किंतु आज कोरोना के महासंकट के बीच हम उनमें पूरी तरह से आत्‍मनिर्भर बनने में सफल रहे हैं।...साथियों बात अगर हम इस उपलब्धियों में के लिए भारत की करें तो पीआईबी के अनुसार, विशाल ज्ञान पूंजी, जीवंत स्टार्ट-अप ईकोसिस्टम और सार्वजनिक तथा निजी अनुसंधान संगठनों द्वारा किए गए अद्भुत काम के कारण जीआईआई रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। परमाणु ऊर्जा विभाग-विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग-जैव प्रौद्योगिकी विभाग और अंतरिक्ष विभाग जैसे वैज्ञानिक विभागोंने राष्ट्रीय नवाचार ईकोसिस्टम को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जैसे-जैसे हम जीवन और आजीविका को बचाने और राष्ट्रीय आर्थिक विकास प्रक्षेपवक्र को आकार देने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, वैसे-वैसे ही जीआईआई-2021 सभी देशों के लिए उनकी नवाचार क्षमताओं और तत्परता का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु होगा, जो आर्थिक सुधार को बढ़ावा देने में एक लंबी दूरी तय करेगा।नीति आयोग विभिन्न क्षेत्रों, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत आदि में नीति नेतृत्व में नवाचार लाने हेतु राष्ट्रीय प्रयासों को अनुकूल सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है। भारत नवाचार सूचकांक, का नवीनतम संस्करण है, जिसे पिछले साल नीति आयोग द्वारा जारी किया गया था, जिसे भारत के सभी राज्यों में नवाचार के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है। नीति आयोग द्वारा वैश्विक रैंकिंग में भारत की स्थिति की निगरानी और मूल्यांकन पर निरंतर जोर दिया गया है, जिसमें जीआईआई भी शामिल है...। साथियों बात अगर हम भारतीय उद्योग परिसंघ की करें तो, यह भी एक नवाचार संचालित अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत की यात्रा के पथ प्रदर्शक के रूप में आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष, नीति आयोग, सीआईआई और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के साथ साझेदारी में, 21-22 सितंबर, 2021 के दौरान वर्चुअल माध्यम से वैश्विक नवाचार कॉन्क्लेव की मेजबानी कर रहा है। साथियों, वैश्विक नवाचार सूचकांक, दुनिया भर की सरकारों के लिए अपने-अपने देशों में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों का आकलन करने का आधार है। पिछले कुछ वर्षों में, वैश्विक नवाचार सूचकांक ने खुद को विभिन्न सरकारों के लिए एक नीति उपकरण के रूप में स्थापित किया है और उन्हें मौजूदा स्थिति को प्रदर्शित करने में मदद की है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व बौद्धिक संपदा संगठन वैश्विक नवाचार सूचकांक 2021 में भारत को बहुत बड़ी सफ़लता प्राप्त हुई है क्योंकि रैंकिंग में भारत की स्थिति बहुत मजबूत हुई है और भारत वैश्विक नवाचार लीडर की ओर बढ़ रहा है वैसे वैश्विक नवाचार सूचकांक रैंकिंग के आधार पर दुनिया भर की सरकारें अपने देशों में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों का आकलन करती है। 


-संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र