IND vs ENG: सचिन तेंदुलकर ने बताया कैसे इंग्लिश कंडिशंस में सफल हो सकते हैं बल्लेबाज

इंग्लैंड की कंडिशंस में दुनिया भर के बल्लेबाजों को स्विंग गेंदबाजी खासा परेशान करती है। मौसम का साथ मिलने पर यहां पर तेज गेंदबाज और भी खतरनाक साबित होते हैं। 12 अगस्त से लॉर्ड्स में शुरू हो रहे भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरे टेस्ट में टीम इंडिया के बल्लेबाजों को भी इस परीक्षा से गुजरना है। लॉर्ड्स का मैदान तेज गेंदबाजों के लिए स्वर्ग माना जाता है और यहां पर गेंद हवा में काफी हरकत करती है। ऐसे में स्विंग गेंदबाजी के खिलाफ किस तरह से बल्लेबाजी की जाने चाहिए और क्रीज के बाहर खड़े होकर क्या इसका तोड़ निकाला जा सकता है। इस पर भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। 

सचिन ने बताया, 'हां, यह काम करता है। आमतौर पर आप क्या करते हैं कि आप बॉलर को जानने देते हैं कि आप क्रीज के बाहर खड़े हैं। तो गेंदबाज को अपनी बॉल का रिलिजिंग प्वॉइंट चेंज करना पड़ता है। जो गेंदबाज गेंद को आगे पिच कर रहा था उसका अपनी लेंथ पीछे खींचनी पड़ती है। अगर कोई शॉर्ट बॉलिंग कर रहा है तो आप क्रीज के अंदर खड़े रह सकते हैं। लेकिन क्रीज के बाहर खड़े रहने बुरा आइडिया नहीं है। कभी-कभी आप सोचते हैं कि यह अच्छी लीव थी, लेकिन आपके और स्टंप के बीच में दूरी बढ़ जाने की वजह से गेंद को टाइम रहता है कि वह आकर स्टंप पर लग जाए। अगर आप क्रीज के बाहर खड़े रहते हैं तो आपको मिडिल स्टंप का गार्ड लेना चाहिए, ना की लेग-स्टंप का। जितना ज्यादा आप क्रीज के बाहर रहेंगे उतना ही आप ऑफ स्टंप की तरफ आगे जाएंगे। इसकी मदद से आप बॉल को बेहतर तरीके से जज कर पाएंगे।'

सचिन ने बताया कि वह अपने करियर के दिनों में मैच से पहले ढ़ग से सो नहीं पाते थे। उन्होंने कहा, 'अगर आप किसी चीज की केयर करते हैं, तो आपके अंदर उसको लेकर बेचैनी आती ही है। यह सिर्फ इसलिए था कि मुझे क्रिकेट से बहुत प्यार था और मैं जब भी मैदान पर जाता था, तो अच्छा करना चाहता था। मैं कहूंगा कि करियर के शुरुआती 12 साल मैं मैच से पहले ढंग से सो नहीं पाता था। मैं लगातार इस बात को सोचता रहता था कि कैसे गेंदबाज का सामना करूंगा, वह कैसी गेंदबाजी करेगा, मेरे पास क्या-क्या ऑप्शन हैं? मैं लगातार यही सोचता रहता था और नींद से जंग चलती रहती थी। मैं जब इससे निपट नहीं पाया, तो मैंने इसको स्वीकार करना शुरू कर दिया। मैंने मान लिया कि इस तरह ही मेरा शरीर और दिमाग मैच के लिए तैयार होते हैं। यह ठीक है और मुझे इससे लड़ने की जरूरत नहीं है। मैंने इस बात को अपना लिया, मैंने खुद से कहा कि ठीक है अगर मैं 12:30 या 1 बजे तक भी जगता हूं, टीवी देखता हूं, गाने सुनता हूं या जो भी करता हूं, इससे फर्क नहीं पड़ता। किसी भी चीज को अपनाना जरूरी होता है।