॥ किस बात की है गुमान ॥

हर पल मौत के मुँह में

समां जाते वाला मानव

किस बात की है तुमको 

इस जग में यह गुमान

हस्ती बस्ती छुट जायेगी

फ़िर क्यूँ है तुँ इस 

बात से बिल्कुल अनजान

बेईमानी से भर ली है तिजोरी

पर साथ कुछ भी ना जानेवाला है

सब कुछ धरा रह जायेगा

जग में जो पाल रखा है 

तेरे करमों का फल तेरे  

साथ निश्चय ही जायेगा

फिर क्यूँ करता है इस

जग में तूँ मनमानी

हर करमों का हिसाब

होगा इक दिन जब

जब धर्मराज सुनेगा

तेरी हर वो कहानी

कोई वकील ना होगा वहाँ

जहॉ लगेगी यमराज का

अदालत उस लोक में

कोई पैरवी काम ना अयेगी

जब सामने होगा उनकी

धर्मराज के जग में

अरथी तेरे साथ विदा होगा

कफन भी ना करेगी मेहरबानी

सब कुछ जब मालुम है तुमको

कि हो जाने वाली है ये कहानी

फिर क्यूं करता है इस जग में

कुकर्म का ये फसाना प्यारे

गुरूर टुट जायेगी तेरी

फिर क्यों लिखता है

ये गलत अफसाना 


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088