"तिरंगा आसमां में"

हिन्द का भी इस जहां में दौर चलना चाहिए

अब तिरंगा आसमां में खूब उड़ना चाहिए।१


एक रुख से गुलसितां बन आज बागों सा हुआ

इस चमन में और भी अब फूल खिलना चाहिए।२


फेंक दो परचम हमारा आसमानी अर्श पर

रौशनी सूरज जरा दो यह चमकना चाहिए।३


जो वतन के काम न आए भला क्या जिंदगी

काम की कैसी जवानी डूब मरना चाहिए।४


घोल कर नफ़रत फिजां में जो हमें लड़वायगा

यार ऐसे कातिलों से अब संभलना चाहिए।५


चल पड़ें हम सरहदों पर मौत जालिम की बनें

बाज की ज्यों टोलियां दुश्मन दहलना चाहिए।६


ऐ खुदा हम मांगते हैं आज तुमसे किस्मतें

अब वतन की राह में हीं दम निकलना चाहिए।७


गुरबतों की धूप में यह खून पानी ना बने

मुल्क का हर एक बच्चा शेर बनना चाहिए।८


या ख़ुदा खुशहालियाँ दें ,दे अमन की रौशनी

यह गुलिस्तां है जो मधुकर गुल महकना चाहिए।९


मधुकर वनमाली

मुजफ्फरपुर बिहार

मो - 7903958085