खोया रिश्ता

अस्पताल में बहुत भीड़ थी, राणा ने किसी तरह बुजुर्ग शिवनारायण मास्टरजी की वहां पर्ची बनवाई, पर उनकी हालत देखकर क्लर्क को दया आ गयी, अभी भारत मे कुछ प्रतिशत मानवता जीवित है। राणा जानता था, मास्टरजी के परिवार में यहां कोई नही है, पत्नी स्वर्ग सिधार गयी और एक बेटा विदेश में है, जो अपने मे मस्त है।

डॉक्टर रमन उनके चेकअप के लिए आये, बुखार बहुत तेज़ था, बुरी तरह कांप भी रहे थे, बीपी देखा बहुत हाई निकला, दवाएं दे दी, फिर भी हालात देखकर उसे घबराहट होने लगी। एक बात और थी पता नही क्यों उनकी नब्ज़ पकड़ते ही, उसे लगा कोई अपना सा है। फिर ध्यान से चेहरा देखा तो महसूस हुआ, शायद बुढ़ापे में मैं बिल्कुल ऐसा ही नजर आऊंगा,और जल्दी से उनके आईकार्ड में नाम देखा, पहचान गया।

विचारो में खो गया था, माँ तो ईश्वर को प्यारी हो गयी, बाद में उनकी डायरी पढ़ी थी। देहरादून के एक स्कूल में वो टीचर थी, वहीं कोई एक टीचर साथ मे कार्यरत थे, कुछ अप्रत्याशित ऐसा माहौल पैदा हुआ कि उन दोनों ने परिवार में शादी की आज्ञा लेनी चाही, पर शिवनारायण के ब्राह्मण माँ, पिताजी ने मना किया और उनको गांव बुला लिया। उसके बाद दोनो कभी नही मिले।

और रमन को टीचर माँ ने अकेले पाला और एक आदरणीय प्रोफेशन में पहुँचाया। 

नर्स ने बुलाया,"डॉक्टर साहब, जल्दी आइये, वो पेशेंट की सांसें रुकती नजर आ रही है।"

अब तो दौड़ पड़े,  डॉक्टर रमन अपने पापा को बचाने, जल्दी से वेंटीलेटर लगाया, और दो दिन पूरी तल्लीनता से देखभाल की। फिर हाथों में हाथ लेकर घर चलने की मिन्नत की, "मैं अकेला हूँ, मेरे सिर पर कोई बुजुर्ग का हाथ हो, इससे बढ़िया और क्या होगा।


स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

बैंगलोर