"किशोर कुमार एक शानदार शख़्सीयत"

4 अगस्त को मध्य प्रदेश के खण्डवा में जन्मे बेजोड़ और बेमिसाल आवाज़ के मालिक और शानदार अदाकार किशोर कुमार किसी परिचय के मोहताज नहीं। उनके एक से बढ़कर एक गाने आज भी उतने ही सदाबहार है। पल-पल दिल के पास तुम रहती हो, आने वाला पल जाने वाला है, या फूलों के रंग से दिल की कलम से तुझको लिखी रोज़ पाती जैसे नग्में आज की पीढ़ी के भी उतने ही फ़ेवरिट है।

किशोर कुमार हिंदी फ़िल्म जगत के सबसे सफ़ल पार्श्व गायकों में से एक थे। वो बहुत ही प्रसिद्ध व्यक्ति है, गायक के साथ ही वो अभिनेता, गीतकार, संगीतकार, निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक भी थे। हिंदी फ़िल्मों में गाने के अलावा उन्होंने बंगाली, मराठी, असम, गुजरती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम, ओड़िसा और उर्दू सहित कई भाषाओँ में गाया है। 

किशोर कुमार का प्रवेश फ़िल्म जगत में बग़ैर किसी औपचारिक प्रशिक्षण के हुआ था। इसका सबसे बड़ा कारण उनके भाई अशोक कुमार का फिल्म जगत में प्रभाव का होना था। 

किशोर कुमार की ज़िंदगी में कई चढ़ा व उतार आए। उन्होंने चार शादियां की थी।

उनकी पहली पत्नी जिन्हे रुमा घोष थी, उन्होंने उनसे 1951 में शादी की थी, वो बंगाली फ़िल्मों की अभिनेत्री और गायिका भी थी। रूमा और किशोर कुमार का एक बेटा है जिनका नाम अमित कुमार है जो कि फ़िल्मों में अभिनेता, गायक, संगीत निर्देशक और फिल्म निर्देशक है। किशोर कुमार की यह शादी 1958 तक चली उसके बाद उन्होंने तलाक ले लिया।

दूसरी शादी उन्होंने फ़िल्म अभिनेत्री मधुबाला से 1960 में की थी। मधुबाला को दिल की बीमारी थी जिस वजह से मधुबाला का जीवन 23 फ़रवरी 1969 को ही समाप्त हो गया।

इनकी तीसरी शादी योगिता बालि के साथ वर्ष 1976 मे हुई थी, हालाँकि दो वर्ष बाद यह शादी भी टूट गई।

किशोर कुमार की चौथी शादी वर्ष 1980 में लीना चंदावरकर से हुई, इस विवाह से उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ, जिनका नाम सुमित कुमार है।

1970 के दशक में किशोर कुमार राजनीति के तरफ आकर्षित हुए थे, इंदिरा गाँधी के इमरजेंसी के दौरान वह इंदिरा गाँधी के मुख्य आलोचक थे।

मशहूर निर्देशक अनुराग बासु ने किशोर कुमार के जीवन पर आधारित एक फ़िल्म बनाने की योजना बनाई है। इस फ़िल्म में किशोर कुमार की भूमिका में रणवीर कपूर नज़र आयेंगे। देखें फ़िल्म कब तक बनती है।

किशोर कुमार को सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक के रूप में 8 फिल्म फ़ेयर पुरस्कार मिले और उस समय उन्होने सबसे अधिक फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। किशोर कुमार को 1985-86 में मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1997 में एमपी गवर्नमेंट ने ‘किशोर कुमार पुरस्कार’ नामक अवार्ड का आरम्भ भी किया है।

किशोर कुमार के जीवन जीने के उसूल कुछ इस प्रकार थे,

दुनिया की हर जगह को अगर प्यार की नज़र से देखो तो वह बहुत ही ज्यादा खुबसूरत लगती है।

कभी कभी इंसान का भाग्य उसे धोखा दे सकता है लेकिन भगवान उसे कभी भी धोखा नहीं दे सकते।

प्रेम या प्यार एक ऐसा अहसास है जो लोगों को बलिदान, त्याग करना सिखाता है।

यदि आप किसी चीज को पाना चाहते है जो आपका पहले कभी नहीं था उसके लिए आपको कुछ नया करना पड़ेगा जो पहले आपने कभी नहीं किया है इस तरह से शायद आप उस चीज को पा लें.

गरीबी और अमीरी में अंतर कभी भी उसके स्थिति को देख कर नहीं लगाना चाहिए . बहुत लोग अमीर होते हुए भी दिल के बहुत छोटे होते है. इस तरह गरीबी और अमीरी का अंतर स्थिति से ही नहीं दिल से भी तय होता है।

ऐसे बहुत सारे सुविचार है।

1986 में किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा था जिस वजह से वो कम रिकॉर्डिंग करने लगे थे। बीमार पड़ने के बाद वो अपने जन्म स्थान खंडवा लौटने की भी योजना बना रहे थे कि फिर से उन्हें अचानक दूसरा दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद किशोर कुमार का देहांत 13 अक्टूबर 1987 को 58 वर्ष की आयु में हो गया। पर उनकी आवाज़ का जादू आज भी तरोताज़ा है। जब भी उनके गाने सुनते है मन आह्लादित हो उठता है।


(भावना ठाकर, बेंगुलूरु) #भावु