बचपन की याद दिलाते देसी खेल

गोंडा । वैसे तो उत्तर प्रदेश में बहुत से देसी खेल प्रचलित है जो आज विलुप्त के कगार पर है। इस क्रम में एक खेल को खेलने के लिए होता था जिसमे सात चपटे पत्थर और एक गेंद की जरुरत होती है। इसमें पत्थरों को एक के ऊपर एक जमाया जाता है। इस खेल में दो टीमें भाग लेती हैं, एक टीम का खिलाड़ी पहले गेंद से पत्थरों को गिराता है और फिर उसकी टीम के सदस्यों को पिट्ठू गरम बोलते हुए उसे फिर से जमाना पड़ता है। इस बीच दूसरी टीम के ख़िलाड़ी गेंद को पीछे से मारते हैं। यदि वह गेंद पिट्ठू गरम बोलने से पहले लग गयी तो टीम बाहर। इसके लिए हमें टेनिस या रबर बॉल की जरूरत होती है। बस ध्यान रहे कि यह बहुत भारी न हो, वरना चोट भी लग सकती है। पिट्ठू खेलने के लिए खुली जगह होनी चाहिए, जिससे खिलाड़ी आसानी से दूरी बनाते हुए अपनी पारी खेल सकें। मैदान की आउटर बाउंड्री तय कर लें और बीचोबीच एक सर्कल बनाकर पिट्ठू का टावर बनाएं। इस सर्कल के दोनों तरफ करीब 3 मीटर की दूरी पर छोटी लाइन खीचें। दो टीमें बनानी होंगी, जिनमें कम-से-कम तीन खिलाड़ी हों। लेकिन जितने ज्यादा खिलाड़ी होंगे, खेलने में उतना ही मजा आएगा।