अंतर्मन

कहते हैं कि जिंदगी में 

जब कुछ भी समझ ना आए

फिर अपने आप को थोड़ा बदला जाए

ऐसा करने से शायद 

कुछ थोड़ा बहुत दर्द कम हो जाए

लेकिन हमने खुद को बदला इतना

कि अब अंतर्मन भी बोल उठा

कि मुझको मुझ में थोड़ा तो कुछ

मेरा भी रहने दिया जाए

लेकिन ये दुनियां इतना होने पर भी है खफा

अब ये बात कौन,मेरे इस पागल दिल को समझाए।


करमजीत कौर,शहर-मलोट

जिला-श्री मुक्तसर साहिब,पंजाब