खांसी-जुकाम ही नहीं, नाखूनों में बदलाव भी देते हैं कोरोना का संकेत

 

बाकी त्वचा की तरह नाखून भी कोरोना होने का संकेत दे सकते हैं। दरअसल, कोरोना के कारण कुछ मरीजों के नाखूनों में भी बदलाव देखने को मिले। ऐसे में वैज्ञानिकों ने अपील की है अगर नाखूनों पर ये लक्षण दिख रहे हैं तो इसे इग्नोर ना करें। सिर्फ कोरोना ही नहीं, नाखूनों में होने वाले बदलाव से डायबिटीज, थायराइड, आयरन की कमी, स्किन इंफेक्शन जैसी कई गंभीर बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। चलिए आपको बताते हैं कि नाखूनों से कैसे पहचाने आपको कोरोना है या नहीं।

नाखूनों से कैसे पहचाने बीमारी?

अगर नाखून पर सफेद अर्धचंद्र के अंतिम मार्जिन को घेरता हो तो सतर्क हो जाए। यह माइक्रोवैस्कुलर चोट या कमजोर इम्यूनिटी का इशारा है।

1. वहीं, कोरोना की शुरूआत में भी नाखूनों पर लाल रंग की लाइन बन जाती है इसलिए इसे नजरअंदाज ना करें।

2. नाखून प्लेट पर ब्लू लाइन दिखना भी कोरोना का संकेत हो सकता है। दरअसल, कोरोना के दौरान अस्थाई रुकावट के कारण नाखूनों पर ब्लू कलर की लाइन दिखने लगती है।

नाखूनों का फीका पड़ना

कोरोना संक्रमित मरीजों में नाखूनों का रंग फीका पड़ने की समस्या भी देखने को मिल रही है। वहीं, कुछ मरीजों में नाखून का आकार बदलने की परेशानी भी देखी गई। वैज्ञानिकों ने इस समस्या को ‘कोविड नाखून’ का नाम दिया है।

कोविड-19 में गिर सकते है नाखून

कई बार कोरोना के चलते नाखूनों की ग्रोथ भी रुक जाती है, जिसकी वजह से नाखून की प्लेट उंगलियों से उतरने लगती है। यहां, तक कि कोरोना के कारण नाखून गिरने का डर भी रहता है, जिसे मेडिकल भाषा में ओनिकोमाडेसिस कहते हैं।

हो सकते हैं ये कारण भी

. इंफेक्शन, गंभीर बीमारियां, दवाओं या ऑटोइम्यून रोग के कारण भी नाखून में ये परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

. बेवजह तनाव में रहना, डिप्रेशन का असर भी नाखून पर असर डालता है, जिसके कारण यह समस्याएं हो सकती है।

. इसके अलावा कुपोषण, कीमोथेरेपी, स्टेरॉयड दवाएं, मधुमेह और फंगल संक्रमण के कारण भी नेल शेडिंग विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है।