---- तीखा तीर -----

विषधारी को पिला क्षीर

चाहत  पाले  कशमीर  

पाक  को  भी  निगल  लेगा 

तुम धरो  कछुक  दिन  धीर 

खेल  गये  हो  आग  से 

हांथ धो बैठोगे  देश  से 

------ वीरेन्द्र  तोमर