हिफाज़त ने पाला है

प्रकृति का आनंद लीजिए

भूलकर ऐसा तो होता ही है

कभी-कभी आपका ही ज्ञान

आनंद लेने से वंचित करता है

देंखे मिट्टी में दबा हुआ बीज

फिर उसे अंकुरित होते हुए

मिट्टी हवा पानी धूप लिया

कितने हैँ उसने संघर्ष किए

दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है

प्राकृतिक खूबसूरती लिए

चलती है तेज तेज हवा

देंखे हर पत्ती क़ो नाचते हुए

बढ़ते बढ़ते ही उसे जाना है

लड़ता है तेज धूप हवाओं से

बारिश इसके लिए है जीवन

पर करना पड़ता है इसे संघर्ष

कद इसका ऊंचा हो गया है

आसमां की ओर जाते हुए

पौधा गति नहीं कर रहा है

बढ़ रहा है गति करते हुए

जड़ें इसकी खूब फ़ैल रहीं हैँ

लम्बी लम्बी रस्सियों की तरह

खूबसूरत हरी-हरी पत्तियां हैँ

मन मोह लेती ये पत्तियाँ  हैँ

ऐसा बिल्कुल मत सोचिए

कि अरे ऐसा तो होता ही है

अब वृक्ष हो गया वह पौधा है

वृक्ष अब छांव भी देने लगा है

पत्तियां बनती हैं बड़ा साधन

भगाने का रोग कई सारे

झूलों का आनंद दे रहा है

यह वही तो छोटा पौधा है

हवा पीकर यह बड़ा हुआ

अब ऑक्सीजन भी दे रहा है

निम्बोरी वृक्ष पर लगी हुई हैँ

गुणों की खान हैँ लिए हुए

कितना खूबसूरत वृक्ष है

अति खुशी है आनंद लेते हुए

हिफाजत ने ही इसे पाला है

वृक्ष रूप आनंद देने वाला है

प्रकृति का आनंद तब होता है

जब ज्ञान एक तरफ होता है

सारे ही पौधे तो बढ़ते हैं

नहीं पौधा बड़ा हो रहा है

मत सोचो फूल खिला करते हैँ

सोचो फूल कितने खूबसूरत हैँ

पौधों से किया गया प्रेम

मानवता से प्रेम करना ही है


पूनम पाठक बदायूँ