लोग आते रहे और चुगते रहे आंगन की धूप...

"ख़त" जो खो गए थे कभी वक्त की गर्त में

हमने आज फिर वही ढूंढने का वादा किया !!


यूं तो रहे मशगूल अपनी-अपनी जिंदगी में 

हमने हर एक छूटे पल पाने का वादा किया !!


हदों से भी अधिक बांटते रहे खुशियों के पल

अपने लिए "दर्द" साथ जीने का वादा किया !!


यूं ,नहीं थी कोई कमी मेरे इस बागबां में भी

हमने वहां दूर बंजर में रहने का वादा किया !!


लोग आते रहे और चुगते रहे आंगन की धूप

हां, हमने सांझ साथ निभाने का वादा किया !!


नमिता गुप्ता "मनसी"

उत्तर प्रदेश , मेरठ