भैया तेरा प्यार

संबंधों की भीड़ में,

रिश्ते कई हजार,

स्वार्थ रहित बस एक है,

भैया तेरा प्यार।

रेशम की इक डोर से,

बला सभी दूँ टाल,

बदले में कुछ भी नहीं,

चाहूँ मैं उपहार।

महके तुमसे मायका,

खिले सुहानी भोर,

गुड़िया,झूले,पंचमी,

राखी का त्योहार।

भैया तुम सा है नहीं,

कोई मन का मीत,

बचपन में तुमसे मिला,

खुशियों पर अधिकार।

गुरु बनकर हर मोड़ पर,

दिखलाई सच राह,

और पिता का रूप धर,

पूरी की मनुहार।

रीति रिवाजों के तले,

हूँ मैं कोसों दूर,

लेकिन भैया मत मुझे,

देना कभी बिसार।

रहे सलामत सौ जनम, 

धागे की यह गाँठ,

मुरलीधर से प्रार्थना,

है यह बारम्बार।


 अर्चना द्विवेदी

 अयोध्या-उत्तर प्रदेश

8004063262