॥ विश्वास ॥

किस पर करूँ विश्वास यहाँ पर

कौन यहाँ पर अपना है

नकाब लगा है कुछ चेहरे पे

विश्वास बना अब सपना है


खुल गई है अविश्वास की दुकानें

सज गये नाकाब के चेहरे

अपनी अपनी लेबल लगाकर

बेच रहे हैं झुठी सपने


क्या नेता क्या अभिनेता

हर कोई जग को ठगता है

विश्वास के नाम पर धोखा देना

अपना फर्ज समझता है


अट्टाहस करता जब गलियों में

अविश्वास का गुर्गा आता है

टुकुर टुकुर देख कर विश्वास

मुँह पे ताला जड़ देता है


बेवस दीख रहा है विश्वास

कौन सुने इनकी फरियाद

सच्चे का हो गया मुँह काला

रो रहा बैठकर विश्वास


सिसकता हुआ विश्वास को देखकर

दिल को ठेस पहुँचता है

पर क्यों मौन है जमाना

अविश्वास का सिक्का जब चलता है


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बॉंका बिहार

9546115088