सचमुच के लड्डू गोपाल

 

कितने सपने देख रखे थे सुमित्रा काकी ने अपने बेटे की शादी के

और कितनी ही मन्नतें मांग रखी थी।

आखिर वो दिन आ गया जिसका सुमित्रा काकी को बरसों से इंतजार था।बहुत खुश थी वो क्योंकि जैसी बहु वो चाहती थी रीना बिल्कुल वैसी ही लड़की थी सर्वगुण सम्पन्न। साथ ही  वो उनके बेटे की पसंद पर भी पूरी तरह खरी उतरती थी।

शादी होते ही सुमित्रा काकी ने अपनी मन्नतें पूरी करनी शुरू कर दी। अभी शादी को कुछ ही दिन हुए थे तो उन्होंने बेटे बहु को बुलाकर वृंदावन दर्शन की इच्छा जाहिर की।साथ ही ये भी बताया कि ये भी उनकी मन्नत है कि बेटा बहु कहीं भी घूमने जाने से पहले वृंदावन जाएंगे कान्हा जी के दर्शन करने।

दोनो बच्चे सहर्ष ही मान गए और वो तीनो चले पड़े वृंदावन के लिए।वहां जाकर रीना ने बोला,

"मम्मी जी ..मैं कान्हा जी का बाल स्वरूप लड्डू गोपाल जी को अपने घर लेकर जाना चाहती हूं। बरसों से मेरी तमन्ना थी कि लड्डू गोपाल जी हमारे घर मे विराजमान हों"

सुमित्रा काकी,"बहु अगर तुम्हारी इतना मन है तो अवश्य लेकर जाओ"

रीना ने बड़े चाव से और खुशी खुशी लड्डू गोपाल जी के साथ साथ उनके वस्त्र, बिस्तर ,मुकुट,बांसुरी आदि सब कुछ अपने घर ले कर आ गयी। 

उस दिन से रीना हर रोज कान्हा जी को सुबह स्नान करवाती, वस्त्र पहनाती और फिर उनको अच्छे से सजाकर भोग लगवाती, आरती करती। रात को उनका बिस्तर लगा कर उन्हें सुलाती। इसी तरह ये क्रम बहुत दिनों तक चलता रहा।

फिर पता चला कि रीना माँ बनने वाली है और नियत समय पर सुमित्रा की बहू ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया।अब रीना दिन रात अपने बेटे की सेवा में ही लगी रहती।

छोटे बच्चे के साथ घर के काम करते करते उसको कान्हा जी के लिए बिल्कुल भी वक़्त नही मिलता था और उनको रोज नहलाने ,तैयार करने और भोग लगवाने जैसे सभी काम अब सुमित्रा काकी को करने पड़ते।

एक दिन सुमित्रा काकी रीना के कमरे में आई और बोली,"बहु मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं"

"बताइए मम्मी जी"

"बहु मैं ये कहना चाहती हूं कि पहले तुम लड्डू गोपाल की कितनी सेवा करती थी।उन्हें समय पर स्नान करवाना,भोजन करवाना सुलाना सब काम कितने लग्न से करती थी।अब तो तुम उनके कोई काम भी नही करती।सब कुछ मुझे ही करना पड़ता है।"

आगे से रीना का जवाब,"मम्मी जी..अब कान्हा जी ने हमारे घर जो सचमुच के लड्डू गोपाल भेज दिए हैं अब उनकी सेवा करती हूं न दिन रात पूरी लगन और प्यार से..!!!

अब सुमित्रा काकी के पास बहु की इस बात का कोई जवाब नही था।


स्वरचित एवम मौलिक

रीटा मक्कड़