प्रार्थना

हे प्रभु तू ले रहा,

यह कैसा इम्तिहान?

हर दिशा है विरान,

इंसा हो रहा परेशान।।


यह कैसा कहर ढा रहा?

हर शख्स घबरा रहा।

जान पर बन आई है,

क्या कीमत लगाई है?


माना हो गई बहुत,

हमसे गलतियां।

ऐशो आराम के लिए,

उजाड़ी हमने बस्तियां।।


धरा को किया छिन्न,

प्रकृति से किया भिन्न।

बंजर हो गई धरती,खतरे

में जीवो का अस्तित्व।।


तू है दाता,

भाग्य विधाता।

कर दे हमें माफ,

समझ के अज्ञान।।


हम है तेरे भक्त,

हमे दे तू बक्ष।

बचा ले जिन्दगी,

यही हमारी बंदगी।।


प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश