रसदार जलेबी

मीठी बहुत रसदार जलेबी।

हर मौसम की बहार जलेबी।।

मिठाईयों की है रानी यह।

न कभी मानती हार जलेबी।।


नाच रही घी में छन-छना-छन।

शीरा पिये हर बार जलेबी।।

महिला, बूढ़े, मजदूर किसान।

सबके हृदय का प्यार जलेबी।।


चमक लड्डू पेड़ों की फीकी।

स्वाद की है सरदार जलेबी।।

निकट बुलाती सदा बच्चों को।

मन मोहती मनुहार जलेबी।।


उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम में।

सबको सुखद स्वीकार जलेबी।।

धनी निर्धन का भेद न करती।

है सबकी मीत यार जलेबी।।

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प्रमोद दीक्षित मलय

शिक्षक, बांदा (उ.प्र.)