अमेरिका सेना के करीबी 'हेरात के शेर' कहे जाने वाले इस्माइल खान को तालिबान ने पकड़ा

अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर कब्जा कर खलबली मचाने वाले तालिबानी आतंकवादियों ने अब 'हेरात के शेर' कहे जाने वाले इस्माइल खान को पकड़ लिया है। अफगानिस्तान में अधिकारियों की तरफ से जानकारी दी गई है कि तालिबान ने वेस्टर्न सिटी हेरात पर कब्जा कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस्‍माइल खान के साथ-साथ अफगानिस्‍तान के उपगृहमंत्री जनरल रहमान और कई आला पुलिस अधिकारियों को पकड़ा गया है।

इस्‍माइल खान पिछले कई दिनों से तालिबान के खिलाफ जंग लड़ रहे थे लेकिन आखिरकार उन्‍हें हार का मुंह देखना पड़ा। बताया जा रहा है कि इस्‍माइल खान, पुलिस और स्‍थानीय सेना के प्रमुख हेलिकॉप्‍टर से हेरात से निकलना चाहते थे लेकिन अफगान सैनिकों ने ही उन्‍हें जाने नहीं दिया। 'रॉयटर्स' ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि एक समझौते के तहत इस्लाइल खान और कुछ सुरक्षा अधिकारियों को तालिबान के हवाले कर दिया गया। 

प्रोविसनल काउंसिल के एक सदस्य गुलाम हबीब हाशमी ने कहा कि 'तालिबानी इस बात पर राजी हो गये कि वो उन सरकारी अधिकारियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे जो सरेंडर करेंगे।' इस समझौते के तहत इस्लाइल खान और कुछ सुरक्षा अधिकारियों को तालिबान के हवाले कर दिया गया। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहित ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्माइल खान को पकड़ा गया है। 

मुजाहिदीन के पूर्व नेता और जमीयत-ए-इस्लामी पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य मोहम्मद इस्माइल खान ने कुछ समय पहले तालिबान को हेरात प्रांत में धूल चटाने की बात कही थी।  70 साल के इस्माइल खान ने पश्चिम में हेरात प्रांत में अपने सैकड़ों वफादारों को तैनात भी किया था। तालिबान के बढ़ते आतंक के बीच इस्माइल खान ने दावा किया था कि वो हेरात में तालिबान को टिकने नहीं देंगे। लेकिन आखिरकार तालिबान ने उन्हें पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी मौजूद हैं जिसमें इस्माइल खान, तालिबानियों के कब्जे में नजर आ रहे हैं।

इस्लमाल खान के बारे में आपको बता दें कि उन्होंने 1970 के दशक में हाथ में असॉल्‍ट राइफल उठा ली थी। इसके बाद उन्‍होंने तालिबान के खिलाफ जंग लड़ी थी उनके कहने पर हेरात शहर के लोगों ने तालिबान के खिलाफ हथियार उठाया था। इतना ही नहीं उनके कहने पर अफगानी सैनिकों को भी हेरात भेजा गया था। 

इस्‍माइल खान भारत के अच्‍छे दोस्‍त बताए जाते हैं। कहा जाता है कि उन्‍होंने सलमा बांध को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। तालिबानियों ने सलमा बांध पर हमला किया है, जिसे अफगान सेना ने विफल कर दिया था। इस बांध को भारत ने बनाया था। इतना ही नहीं अप्रैल महीने में इस्‍माइल खान भारत भी आए थे और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।

पिछले महीने ही अफगान राष्‍ट्रपति अशरफ गनी ने भी इस्‍माइल खान से मुलाकात की थी और मदद का पूरा आश्‍वासन दिया था। 2001 में जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान पर हमला किया था तो सत्ता पर काबिज तालिबान को हटाने के लिए उस वक्त अमेरिकी सेना को भी इनकी मदद लेनी पड़ी थी।