आओ श्याम प्यारे

बरसे सावन की फुहार, 

मनवा व्याकुल हमार,

आओ आओ श्याम प्यारे, 

काहे भूले देश द्वार।

झूला पवन संग झूले,

पेंग सखियन की भूले,

मेंहदी रंग भूली अपना,

अखियां भूल गई सपना,

कीर्तन करे मन मुरलिया, 

सांसे पायें न सम्भांर।

आओ आओ श्याम प्यारे, 

काहे भूले देश द्वार।

सूनी चूड़ी बिन कलाई,

कैसे मन का समझाई,

तुम बिन भावे न चुनरिया,

सूनी गांव की डगरिया,

राधा अंसुवन से भीगी, 

तुमका रही है पुकार।

आओ आओ श्याम प्यारे, 

काहे भूले देश द्वार।

कोयल कूके डाली डाली,

प्रकृति झूमे मतवाली,

नदियां चूमे है किनारे,

काहे रूठे श्याम प्यारे,

भौंरे सुमनों पे डोल डोल ,

गुनगुन करें गुंजार।

आओ आओ श्याम प्यारे, 

काहे भूले देश द्वार।


सीमा मिश्रा,बिन्दकी-फतेहपुर,उ0प्र0