कौन है जो जान ले

कौन है जो जान ले वाचाल हृदय का मौन?

छुपकर विद्रुम बेला को स्याह बनाया कौन?

असंख्य किरणों के बीच लघु कण वो तम का,

किसने छेड़ा विरह राग,प्रकाश को छुपाया कौन?


मेरी ही चित से उभरे इंद्रधनुष के गहरे रंग,

हूँ मैं ही श्याम श्वेत,मुझमें है अपरिमित वर्ण।

सजीली मंजु मुख कीआभा अबरन बनाया कौन?

सस्मित दृगों में असीमित अश्रुनीर सजाया कौन?


कामना की तृप्ति के मिस हर पल रही नदिया अतृप्त,

तृषित ही रहा चातक,बूँद स्वाति न कर पाई अभिषिक्त।

सघन मेघ को बरसने से पहले उड़ाया कौन?

आकुलित दुकूल विरहिणी को पहनाया कौन?


जीकर मर्म जाना मृत्यु का,जीवन को न जान पायी,

विकल श्वासों से निश्वास को पहचान पायी,

मृदु स्वप्नों की हरियाली में रेणु उड़ाया कौन?

सुनहरी यादों को क्षार समुंदर में नहलाया कौन?


रीमा सिन्हा (लखनऊ)