हे गिरिधर से नंदगोपाल

हे गिरिधर हे नंदगोपाल,

तेरे स्वागत में सजाए बैठी हूँ थाल।

अब तो आ जा कन्हैया,

कर दो हमको मलामाल।

हे नटवर हे नटखट कृष्णा,

कैसी है जीवन की तृष्णा।

मेरे जीवन की एक ही इच्छा,

मेरे घर भी आओ कृष्णा।

हे द्वरिकधीश हे देवकीनंदन,

तेरी राह तके है वंदन।

आओ चख लो मेरे घर का,

दूध दही और मिश्री माखन।

हे पार्थसारथी हे प्रजापति,

कर दो मेरे दुखों की समाप्ति।

अंतर्मन अब तुझे पुकारे,

आ जाओ बन कर प्राणपति।


वन्दना पांडेय,शिक्षिका व कवयित्री  

रामपुर कारखाना,देवरिया-उत्तर प्रदेश