बारिशों का इंतज़ार लिखना..

सुना है, बखूबी समझ लेते हो सबके "मन के हालात",

अबकि जब लिखना, मेरी बेचैनियों का हिसाब रखना !!


एक ख्वाब "अधूरा" ही रह जाता है अदद् नींद के बगैर

अबकि जब लौटो, मेरे रतजगों का इतिहास लिखना !!


दिया होगा जरूर, कभी किसी ने अपना थोड़ा सा वक्त,

अबकी जब लिखना, उन लम्हों की "संभाल" लिखना !!


तुमने "प्रेम" लिखा, उसका "एक-एक एहसास" लिखा

हो सके तो अबकी "राधा-कृष्ण का इंतजार" लिखना !!


बेशक आता होगा हुनर तुमको शब्दों की अदायगी का ,

कभी उसका "अनकहा वो" बेसबब, बेहिसाब लिखना !!


गुज़र ही जाती है जिंदगी, हर किसी को खुश रखने में ,

"मनसी"..खुद की ख्वाहिशों का भी "ख्याल" लिखना !!


सुनों..

तरसते ही रहे जाते हैं हर मौसम में ये सूखे रेगिस्तान ,

न लिखना चिट्ठी बादलों को, बारिशों का इंतजार लिखना !!


नमिता गुप्ता "मनसी"

उत्तर प्रदेश, मेरठ