जिलों में खाद की किल्लत, किसान परेशान

भोपाल। प्रदेश के कई जिलों में रासायनिक खाद की किल्लत शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा कमी विदिशा, बैतूल, सतना, डबरा और बालाघाट जिले में है। यहां सहकारी समितियों में खाद का पूरा स्टॉक खत्म हो चुका है। समितियां और किसान खाद के आने का इंतजार कर रहे हैं। अभी प्रदेश में करीब एक लाख खाद का स्टॉक है। खाद की नियमित आपूर्ति के लिए सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव ने केंद्रीय रसायनिक एवं उर्वरक विभाग के सचिव से मिलकर चर्चा भी की है। प्रदेश में जिस तरह से खेती का रकबा बढ़ा है, उसके हिसाब से 40 लाख टन खाद की जरूरत किसानों को है, लेकिन सिर्फ 258 लाख टन खाद ही मिल पा रही है। पिछले खरीफ सीजन में किसानों को दस लाख टन खाद मिली थी, लेकिन इस वर्ष सिर्फ  आठ लाख टन ही खाद मिल पाई है। प्रदेश में सबसे ज्यादा यूरिया की खपत है। यहां दस लाख टन अकेले यूरिया की सप्लाई होती है। खाद की कमी के चलते अब उसकी कालाबाजारी शुरू हो गई है। इससे सबसे ज्यादा उन किसानों को परेशानी होती है, जो डिफॉल्टर हो गए हैं। उन्हें समितियां खाद देने से हाथ खड़े कर देती है। ऐसे में वे साहूकारों के माध्यम से खुले बाजार में औने-पौने दामों में खाद खरीदते हैं। सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार खाद की रेक एक-दो दिन में आने की संभावना है। इस हफ्ते दो लाख टन खाद की सप्लाई होगी। जिससे जिलों में खाद की आपूर्ति बराबर हो जाएगी। खाद की इस रैक के आने के बाद किसानों को भरपूर खाद मिल पाएगी। खाद की किल्लत भी खत्म हो जाएगी।