"क्या सच में हम देश को अपना समझते है"

मना लिया स्वतंत्रता दिवस, देश के प्रति कर्तव्य पूरा हो गया? क्या सच में हम देश को अपना समझते है? हरगिज़ नहीं ये तो

एक दिन भारतीय होने की बात है, फिर वही धर्म और जात-पात है। 

आज स्वतंत्रता दिवस पर हर भारतीय के दिल में देशप्रेम का कितना जोश और जज़बा दिखा। हर ज़ुबाँ पर जय हिन्द, वंदेमातरम और भारत माता की जय का नारा था। और ये नारे सुनकर हमारे रौंगटे खड़े हो जाते हैं माँ भारती के प्रति हम नतमस्तक हो जाते है। हमें लगता है कितना एकजुट है हमारा देश। कितना भाईचारा और अपनापन है हर इंसान के बीच। 

पर स्वतंत्रता दिन समाप्त होते ही कहाँ गायब हो जाती है देशप्रेम और भाईचारे की भावना? क्यूँ छोटी सी बात पर लाठियां चल जाती है? क्यूँ जात-पात पर और धर्म को लेकर दंगे फ़साद और कड़वाहट फैल जाती है। एक ही वतन, एक ही मिट्टी, एक ही सरज़मीं पर पले बड़े हम एक होकर क्यूँ नहीं रह सकते।

देशप्रेम की भावना ताउम्र हर किसीके दिल में क्यूँ नहीं पनपती रहती है। "एकजुटता में ताकत है" हम सबकी रगो में बह रहा है एक ही रंग का खून, धार एक, एक ही धरा है, एक ही पानी एक ही हवा है, एक ही भाषा रंग रूप सब एक ही है तो फिर तिरंगे को हम क्यूँ बाँट रहे है धर्म जाती के नाम पर।

जिस घर को विभाजित कर दिया जाता है तो वह घर दोबारा खड़ा नहीं हो सकता। हम अपने देश को बाँट रहे है। ज़ाहिर सी बात है एक ही देश में रहने के बावजूद अलग-अलग विचारधाराओं के चलते अनबन होती रहेगी उस देश की नींव मजबूत कैसे होगी। अगर भारत को सिरमौर बनाना है तो देश को एकजुटता की जंजीर में बाँधना होगा। स्वर्णिम भारत का सपना हर कोई देखता है, पर इस सपने को साकार करने की दिशा में कदम कोई नहीं बढ़ाता।

भारत के प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में एक वाक्य है, कोई ऊंचा नहीं, कोई नीचा नहीं, सभी समृद्धि और विकास की ओर अग्रसर हो रहे बंधु बांधव मात्र हैं। सभी उसी देवता के पुत्र हैं। सभी प्राणियों के हृदय में उसी देवत्व का वास है। इनमें यह स्पष्ट है कि चूंकि प्रत्येक मनुष्य के हृदय में समान रूप से उसी ईश्वरीय सत्ता का वास है। 

ईश्वर कहो या अल्लाह शक्ति एक है, तो हम क्यूँ धर्म और जाति के नाम पर मशाल लेकर निकल पड़ते है। 

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, लिंगायत, पारसी सभी शपथ खाकर ये क्यूँ नहीं कहते कि भारत हम सबका है।  हिन्दुओं मस्जिद में जाओ, हमें इससे कोई एतराज नहीं। मुस्लिम तुम मंदिर में आओ हमें खुशी है, पर भारत की टीम क्रिकेट में पाकिस्तान से हार जाए तो भारत के मुसलमान दीपक क्यों जलाएं? अयोध्या में मंदिर राम का बने, इसके लिए मुसलमान हिंदू भाइयों के साथ बैठ कर योजना क्यों न बनाएं?

बाबर के नाम पर बनी मस्जिद तोड़ दी, टूट गई तो टूट गई, अब कब तक इसी पर आंसू बहाते रहेंगे? देश तुम्हारा भी है, हमारा भी। बहुत लड़ लिया, अब देश को आगे नहीं बढ़ाना क्या? सब देशवासी हृदय विशाल करें। हमारी अनेकता ही हमारी विशेषता है।

अमन और शांति की परिभाषा बनकर हम क्यूँ नहीं रह सकते। अगर इतना ही देशप्रेम दिल में पनपता है तो हर रोज़ स्वतंत्रता दिवस मनाते इस जज़बे को कायम रखते क्यूँ न देश की अखंडता को बरकरार रखें, और स्वर्णिम भारत की मुहिम चलाकर देश को उपर उठाए।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु) #भावु