नीरज चोपड़ा ने बताया अपना अगला लक्ष्य

स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने के बाद अगली प्रतियोगिताओं में 90 मीटर भाला फेंकने को अपना अगला लक्ष्य बनाया है। ओलंपिक में भारत के दूसरे व्यक्तिगत गोल्ड मेडल विजेता नीरज तो शनिवार को ही खेलों के रिकॉर्ड (90.57 मीटर) को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन वह वहां तक नहीं पहुंच पाए। चोपड़ा ने अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद कहा, 'भाला फेंक एक तकनीकी स्पर्धा है और काफी कुछ दिन की फॉर्म पर निर्भर करता है। इसलिए मेरा अगला लक्ष्य 90 मीटर की दूरी तय करना है।'

उन्होंने कहा, 'मैं इस साल केवल ओलंपिक पर ध्यान दे रहा था। अब मैंने गोल्ड मेडल जीत लिया है तो मैं भावी प्रतियोगिताओं के लिए योजनाएं बनाऊंगा। भारत लौटने के बाद मैं इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विदेशों के वीजा हासिल करने की कोशिश करूंगा।' चोपड़ा ने 13 जुलाई को गेटशीड डायमंड लीग से हटने के बाद कहा था कि वे ओलंपिक के बाद इस शीर्ष स्तर की एक दिन की सीरीज के बाकी चरणों में हिस्सा ले सकते हैं।

लुसाने (26 अगस्त) और पेरिस (28 अगस्त) के चरणों के अलावा ज्यूरिख में नौ सितंबर को होने वाले फाइनल में भी भाला फेंक की स्पर्धा शामिल है। हरियाणा के पानीपत के खांद्रा गांव के रहने वाले 23 वर्षीय नीरज ने कहा कि वह किसी तरह के दबाव में नहीं थे और वैसा ही काम कर रहे थे जैसा कि अन्य इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं के दौरान करते हैं। उन्होंने कहा, 'किसी तरह का दबाव नहीं था और मैं इसमें (ओलंपिक) किसी अन्य प्रतियोगिता की तरह ही भाग ले रहा था। यह ऐसा ही था कि मैं पहले भी इन एथलीटों के खिलाफ भाग ले चुका हूं और चिंता की कोई बात नहीं है। इससे मैं अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर पाया। इससे मुझे गोल्ड मेडल जीतने में मदद मिली।'

चोपड़ा ने कहा, 'हां, मैं यह सोच रहा था कि भारत ने अब तक एक एथलेटिक्स में पदक नहीं जीता है, लेकिन एक बार जब मेरे हाथ में भाला आया तो ये चीजें मेरे दिमाग में नहीं आईं।' चोपड़ा ने ओलंपिक से पहले तीन इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था लेकिन केवल एक में चोटी के एथलीट शामिल थे। उन्होंने कहा, 'सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मुझे ओलंपिक से पहले इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिला। मैं इसके लिए बेताब था। मैंने लक्ष्य ओलंपिक पोडियम कार्यक्रम (टॉप्स), भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) से कुछ प्रतियोगिताओं की व्यवस्था करने के लिए कहा। उन्होंने ऐसा किया जिसकी बदौलत मैं आज यहां हूं।'