संसकार की विरासत

राजकुमारी चौकसे जी से मेरी मुलाकात कभी भी रूबरू नहीं हुई है। मेरा उनसे परिचय निर्दलीय समाचार पत्र में प्रकाशित उनकी रचनाओं और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा दिये जा रहे योगदान के माध्यम से रहा है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी राजकुमारी चौकसे जी द्वारा लिखित पुस्तक संस्कार की विरासत। जब मुझे हमारे आदरणीय निर्दलीय समूह के प्रबंध संपादक श्री कैलाश आदमी द्वारा उपहार स्वरूप निर्दलीय समाचार पत्र के कार्यालय में यह पुस्तक भेंट करी। तब उन्होंने मुझसे कहा कि मैं चाहता हूं कि इस पुस्तक की समीक्षा आप करें। मैं इसे अपना सौभाग्य मानती हूं कि मुझे इस पुस्तक की समीक्षा का अवसर प्राप्त हुआ।

इसके लिये मैं निर्दलीय समूह के प्रबंध संपादक महोदय जी का कोटी-कोटी आभार व्यक्त करती हूं। राजकुमारी चौकसे एक उच्च कोटिे की लेखिका के साथ ही अत्यंत विनम्र एवं दयालु समाजसेविका भी हैं। इनके द्वारा लिखित पुस्तक संस्कार की विरासत में एक बेटी का अपने पिता के प्रति असीम प्रेम और अनुराग के साथ ही पिता के जीवन में आने वाले विभिन्न पड़ावों को तस्वीर रूपी दृष्य एवं वृतांत के माध्यम से अत्यंत भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करा है। पुस्तक में कुछ स्वयं के अनुभवों के साथ ही एक पिता का अपनी पुत्री के प्रति प्रेम और वात्सल्य तथा पारिवारिक सदस्यों के साथ ही उनके बचपन से लेकर अंतिम समय तक साथ निभाने वाले इष्ट मित्रों एवं शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही देश के प्रतिष्ठित एवं गणमान्य लोगों के विचारों का भी समावेश करा है।

 राजकुमारी चौकसे द्वारा लिखित पुस्तक संस्कार की विरासत जो कि स्वर्गीय मास्टर गेंदालाल जी जायसवाल की स्मृति में लिखी है। यह एक पुत्री का अपने पिता के प्रति अगाध प्रेम का दर्शन है। इस पुस्तक को पढ़ने के पश्चात् हर किसी को लगेगा कि ऐसी भावविह्वील कर देने वाली श्रद्धांजली तो सिर्फ एक बेटी ही अपने पिता को दे सकती है। इस पुस्तक में श्री गेंदालाल जी जायसवाल जी की स्मृति में उनकी वंशावली एवं जीवन गाथा को तस्वीरों एवं शब्दों के ताने-बाने को जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण पड़ावों के माध्यम से बहुत ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करा गया है। इस पुस्तक को पढ़ने वाले पाठक गण राजकुमारी चौकसे जी की पितृ भक्ति से प्रभावित हुये बिना नहीं रह सकते हैं।

 राजकुमारी चौकसे जी नें अपने पिता द्वारा उनके जीवन में स्थापित आदर्शों को स्वयं के जीवन में उतारने का हर संभव प्रयत्न करा है। मेरे जीवन का यह पहला अनुभव है कि मैंने एक बेटी को अपने पिता की स्मृति में जन कल्याण की भावना से ओतप्रोत होकर संस्कार की विरासत नामक पुस्तक को लिपीबद्ध करने का कार्य सुन्दर एवं शालीनता पूर्वक संपन्न करा है। ऐसा पुस्तक के माध्यम से महसूस करा है। इस पुस्तक में परिवार के सदस्यों के साथ ही ईष्ट मित्रों नें भी अपने हृदय के उद्गार व्यक्त करें हैं। 

साथ ही इस पुस्तक में बधाई पत्रों का तारतम्य पूर्ण समावेश,अलंकरण व सम्मान के साथ आभार और अंत में पूर्णाहुति से सुसज्जित पुस्तक में अपनी बात के माध्यम से एक पुत्री द्वारा हृदय की गहराइयों में जाकर अपने पिता के साथ प्रेम-स्नेह की भावनाओं से बंधे रिश्ते को वर्णित करते हुये उनके जीवन में आये उन सभी छोटे - बड़े सदस्यों के प्रति अत्यंत विनम्रतापूर्वक आभार व्यक्त करा है। इसके साथ ही शुभकामना संदेशों में डॉ सीतासरन शर्मा अध्यक्ष विधान सभा,मनोज श्रीवास्तव प्रमुख सचिव वाणिज्यक कर संस्कृति धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्रालय वल्लभवन, आलोक शर्मा महापौर नगर पालिका निगम,बाबुलाल गौर मंत्री गृह विभाग एवं जेल विभाग मध्यप्रदेश शासन।

 दुर्भाग्य से बाबुलाल गौर जिन्हें सभी प्यार से बाबुजी कहते थे अब हमारे बीच नहीं रहें हैं।इसके साथ ही कुछ नेता तथा अधिकारी भी अब वर्तमान समय में उस पद पर आसीन नहीं रहे हैं। इसके साथ ही श्रीमती कृष्णा गौर महापौर नगर पालिका निगम आदि प्रतिष्ठित गणमान्य जनों के शुभकामना संदेश पुस्तक को जनप्रिय बनाते हैं। मेरे हृदय में राजकुमारी चौकसे की छवी एक भावुक,संवेदनशील अपने विषय की जानकार विदूषी एवं जनकल्याण की भावना से ओतप्रोत,निर्मल एवं अत्यंत निश्चल छवि वाली रही है। 

अक्सर निर्दलीय समाचार पत्र में राजकुमारी चौकसे जी की रचनाओं को पढ़ती हूं तो ऐसा लगता है मानो सरोवर से आने वाली शांत हवा जो अपने साथ सुगंध तथा ताजी हवा प्राण वायु बन साथ लेकर आ रहीं हैं, ऐसा महसूस होता है। इनके द्वारा रचित रचनाएं तथा जन कल्याण हेतू समाजसेवा हर समय एक नवीन सृजनात्मक दृश्य उपस्थित करती हुई प्रतीत होती हैं। संस्कार की विरासत पुस्तक पठनीय होने के साथ ही समाज को सकारात्मक संदेश भी दे रही है। 

यह पुस्तक की विशेषता है कि यह सामान्य पुस्तकों से अलग हट कर समाज में एक नये आयाम स्थापित कर रही है। हम अपने सभी सम्मानीय पाठकों की तरफ से राजकुमारी चौकसे (लेखिका )को उनकी पुस्तक संस्कार की विरासत के लिए शुभकामनाएं देते हैं। और चाहते हैं कि हर पुत्री अपने जीवन में राजकुमारी चौकसे जी से प्रेरणा ले कर अपने पिता के संस्कार की विरासत को आगे बढ़ाये।


रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार

 ramamedia15@gmail.com