अटल थे,अटल हो,अटल ही रहोगे

"हार नहीं मानूंगा

रार नहीं ठानूंगा 

काल के कपाल पर

लिखता मिटाता हूं 

गीत नया गाता हूं"

दोस्तों यह पंक्तियां किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। इन पंक्तियों को मात्र सुनने भर से बच्चे बच्चे के मस्तिष्क पटल पर ग्वालियर मध्य प्रदेश में जन्मे अटल जी की छवि अंकित हो आती है। अटल जी एक व्यक्ति नहीं अपितु एक व्यक्तित्व थे। अटल बिहारी बाजपेई जी अपनी चिर परिचित मुस्कुराहट ,सौम्यता एवं अटल व्यक्तित्व की वजह से देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपनी एक अलग पहचान रखते थे ।अटल जी एक ऐसी जादुई शख्सियत के मालिक थे जिन्होंने राजनीति में तो बुलंदियों को छुआ ही साथ ही साथ अपने मन के भावों को कविता का रूप देकर उन्होंने हम सभी के दिलों पर भी राज भी किया।

 राजनीति में आने से पूर्व अटल जी पत्रकारिता से जुड़े हुए थे ,परंतु प्रधानमंत्री पद पाने के बाद भी वे सदैव धरातल से जुड़े रहे एवं अपने प्रधानमंत्री पद का कभी दुरुपयोग नहीं किया ।इस पद पर आसीन रहने के बावजूद भी वे अपने सभी पत्रकार मित्रों से उतनी ही घनिष्ठता से और प्रेम पूर्वक मिला करते थे जितना कि प्रधानमंत्री बनने से पहले ।यह अटल जी के व्यक्तित्व का जादू ही था कि अपने संबोधन द्वारा न केवल अपनी पार्टी के लोगों अपितु विपक्षी पार्टी के नेताओं द्वारा भी वे हमेशा सराहे जाते थे ।जैसे ही उनकी रैलियों की खबर आती थी लोग हजारों की तादाद में उन्हें सुनने के लिए एकजुट हो जाते थे और अपने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत भी करते थे ।

अपनी बात को शालीनता और प्रभावपूर्ण तरीके से कहने की कला में अटल जी पारंगत थे ।किसी व्यंग्य को भी अटल जी इतनी सहजता से कह देते थे कि सामने वाले को बुरा भी नहीं लगता था और अटल जी का संदेश भी उन तक पहुंच जाता था।अपनी भाषा में शब्दों का चुनाव करने में अटल जी अति कुशल एवं दक्ष थे जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण उनके सभी भाषणों में सुनने देखने को मिलता है ।इसीलिए उन्हें शब्दों का जादूगर भी कहा जाता था ।यही वजह रही कि उनके आलोचक भी उनके शब्दों के कायल हुआ करते थे ।

अटल जी अंग्रेजी भाषा पर अपनी पकड़ रखते थे ,परंतु हिंदी में बोलने पर उनकी पकड़ और कहीं ज्यादा मजबूत थी जो उनकी कविताओं में हमेशा निखर कर सामने आती थी।लोकतंत्र के प्रति उनका अगाध विश्वास था।उनके सभी संबोधनों में लोकतंत्र के रूप में भारत की महत्ता एवं सशक्तता साफ तौर पर झलकती थी ।भारत की प्रगति और विकास में अटल जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है ।

हिंदी के प्रति अटल जी का अगाध प्रेम था,साथ ही उन्हें कविताएं लिखने का भी बहुत अधिक शौक था परंतु राजनैतिक व्यस्तता के चलते वह कविता लेखन पर ज्यादा समय नहीं दे पाते थे। उनके अनुसार कविताएं लिखने के लिए शांत उचित एवं उपयुक्त वातावरण का होना अति आवश्यक है। बिना एकाग्रता के कविता लिखी ही नहीं जा सकती क्योंकि कविता आत्मभिव्यक्ति का नाम है और वह आत्म अभिव्यक्ति शोर-शराबे के माहौल में कभी भी नहीं हो सकती। इसलिए बाजपेई जी अपने खाली समय में ही कविताएं लिखते थे और अपनी कविताओं के कुछ अंश अपने भाषणों में भी प्रयोग किया करते थे जिसको सुनकर लोग जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया करते करते थे। 

आजादी के लिए खतरा पैदा करने वालों पर अटल जी अपने अंदाज में कुछ इस प्रकार से बसा करते थे:-

" इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो 

कि चिंगारी का खेल बुरा होता है 

औरों के घर आग लगाने का जो सपना 

वह अपने ही घर में सदा खड़ा होता है ।।"

लोकतंत्र की मर्यादा को बरकरार रखने एवं पड़ोसी देशों से अपने राजनीतिक संबंध सुधारने की दिशा में अटल जी ने बहुत काम किया जिसकी वजह से सत्ता के गलियारों में वाजपेई जी को अजातशत्रु कहा जाता था। अपने राजनैतिक जीवन के सफर में अटल जी ने कई उतार-चढ़ाव देखे परंतु कभी किसी को नीचा नहीं दिखाया और किसी का हास परिहास नहीं किया ।

अटल जी प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बनाने की सामर्थ्य एवं आत्मविश्वास रखने वाले व्यक्तित्व थे ।उनके मन सदैव एक यही इच्छा रहती थी कि कोई उनके व्यक्तित्व पर उंगली ना उठाएं ।वह एक दाग रहित जीवन जीने की चाह रखते थे। उन्होंने कहा भी था कि क्योंकि मैं राजनीति में दाखिल हो चुका हूं और इसमें फंस गया हूं तो मेरी इच्छा थी और अब भी है कि बगैर कोई दाग लिए जाऊं और मेरी मृत्यु के बाद भी लोग यही कहें कि वह अच्छे इंसान थे जिन्होंने अपने देश और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की कोशिश की ।अटल जी कभी ना भूलने वाली शख्सियत का ताज पहन कर 16 अगस्त 2018 को हम सभी को छोड़कर अनंत यात्रा पर चले गए। 

आज इतने सालों बाद भी जब भी अटल जी की रचनाएं पढ़ते हैं तो बस यही लगता है कि अटल जी यहीं कहीं हमारे आसपास हैं।यह उनके जादुई व्यक्तित्व का ही प्रभाव है जो हमें उनके जाने के बाद भी कभी यह एहसास नहीं होने देता कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं।

 सही मायनों में अटलजी एक अमर व्यक्तित्व हैं।उनकी इन्हीं पंक्तियों के साथ उनको भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित:

आओ फिर से दिया जलाएँ

भरी दुपहरी में अँधियारा

सूरज परछाई से हारा

अंतरतम का नेह निचोड़ें-

बुझी हुई बाती सुलगाएँ।

आओ फिर से दिया जलाएँ...


पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग

 दिल्ली