हॉकी ओलम्पिक में जर्मनी के दांत खटटे करने वाले ललित का भव्य स्वागत

रिपोर्ट-चन्द्र कुमार तिवारी

गाजीपुर। टोक्यों ओलम्पिक 2021 के हाकी मैदान में जर्मनी के दात खटटे करने वाले ओलंपियन ललित उपाध्याय का जनपद में भव्य स्वागत किया गया। ओलम्पिक में 41 वर्षो से हॉकी में पदक के टोटा को दूर करते हुए भारतीय हॉकी टीम ने हॉकी के जादुगर कहे जाने वाले मेजर ध्यान चन्द की यादों को ताजा कर दिया। हॉकी मैदान के रणबांकुर ललित का जन्म भले ही वाराणसी में हुआ हो लेकिन उनकी कर्मभूमि करमपुर का श्री मेघबरन सिंह हॉकी स्टेडियम गाजीपुर रहा है। जहा से उनका जुड़ाव जेहानी रहा है। श्रीमेघबरन सिंह हॉकी एकेडमी करमपुर में राष्ट्रीय खेल हाकी के खिलाड़ियों की नर्सरी स्वर्गीय ठाकुर तेज बहादुर सिंह द्वारा लगाई गई जो अब युवावस्था में ओलम्पिक तक जा पहुंची है। इस नर्सरी के पौध रहे ललित उपाध्याय पुत्र सतीश उपाध्याय पूरी दुनिया में हिंदुस्तान कां परचम लहराते हुए टोक्यो ओलंपिक हॉकी प्रतियोगिता में जर्मनी को 5-4 से कड़ी शिकस्त देते हुए कांस्य पदक जीतकर ठाकुर तेज बहादुर सिंह के सपनों को साकार किया। हॉकी में देश में अपना स्थान रखने वाले करमपुर का नाम पूरे दुनिया में विख्यात करने का काम किया। ललित उपाध्याय द्वारा पूछे जाने पर उसने बताया कि मेरे दिल में एक मलाल रह गया उन्होंने बताया कि गुरु स्वर्गीय तेज बहादुर सिंह का सपना साकार तो हुआ लेकिन मेरे दिल में एक आस लगी रह गयी, मैं सोचता था कि कोई भी पदक जीत कर के मैं अपने गुरु के चरणों में रखकर गुरु और शिष्य की भूमिका निभाता रहूंगा तो भगवान की कृपा से अधूरा रह गया। अंत में ललित उपाध्याय द्वारा पूर्व सांसद राधामोहन सिंह वह रमाशंकर सिंह व गंगासागर सिंह के स्नेह प्रेम का बखान करते  हुए यह बताएं कि मैं इस करमपुर की धरती का इस परिवार का हमेशा ही आभारी रहूंगा जो कुछ भी है तेजू भैया का प्रसाद है उन्हीं के अथक परिश्रम से मैं इस ऊंचाइयों पर पहुंचने का काम किया। ललित उपाध्याय के स्वागत समारोह में मंच की अध्यक्षता करते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष सुदर्शन यादव द्वारा ललित उपाध्याय का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। इसी कड़ी में पूर्व सांसद राधे मोहन व रमाशंकर, गंगासागर, प्रमोद सिंह व प्रभाकर सिंह, दीपक सिंह व कोच इंद्रदेव, मनोज कुमार सिंह इत्यादि सैकड़ों लोगों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।ं अपने गुरु को मरणोपरांत द्रोणाचार्य पुरस्कार दिलाने की मांग की।