देश प्रेम

देश प्रेम के गीत हम गाएंगे, 

देश की खातिर हम जिए जाएंगे, 

जिस देश में हमने जन्म लिया है, 

उस देश की रज से, 

तिलक हम लगाएंगे। 


वीर शहीदों की कुर्बानी का, 

वीर योद्धाओं की निशानी का, 

इतिहास की गाथा हम गाएंगे, 

देश प्रेम के गीत हम गुनगुनाएंगे। 


देश प्रेम पूजा है यहां, 

न ऐसा कोई सत्कर्म है यहां, 

जन्म लिया तो क्या हुआ,  

व्यर्थ हो जाता है जीवन, 

जिस हृदय में देश प्रेम न रहा। 


रखें शहीदों की लाज, 

करें देश प्रेम का आगाज, 

कायर बनकर क्या जीना, 

देश प्रेम से भर ले सीना। 


राम,कृष्ण की ये धरा ,

लक्ष्मी भाई भी थी यहां, 

वीर वीरांगनाओ की, 

गुंजती सदा गाथा यहां, 

सीख अपने देश से, 

और देश के इतिहास से, 

हम ले जायेंगे, 

देश प्रेम में डूब कर, 

देश प्रेम के गीत हम गुनगुनाएंगे। 


कितने ही घाव मिले हैं देश को, 

लूटा है दुश्मनों ने इसको, 

देश के घाव हम भर जाएंगे, 

समृद्ध देश को बनाएंगे, 

देश प्रेम में डूब कर हम, 

देश प्रेम के गीत गुनगुनाएंगे। 


स्वरचित -अनामिका मिश्रा 

झारखंड, सरायकेला (जमशेदपुर)