सहेली

सहेली एक पहेली सी

कभी गुमसुम

कभी चहकती

कभी आँखों में आँसू

कभी होठों पे मुस्कान

कभी खुद से हारती

कभी खुद से लड़ती

सहेली एक पहेली सी

कभी सावन

कभी पतझड़

कभी विरह

कभी मिलन

कभी तपन

कभी सर्द

सहेली एक पहेली सी

कभी सताती

कभी मनाती

कभी तोड़ती

कभी जोड़ती

कभी मीत

कभी बैरी

सहेली एक पहेली सी

बड़ी ही अजीब है ज़िन्दगी तू

कभी अपनी सी

कभी परायी सी

कभी पहेली सी

कभी सहेली सी।।


.....मीनाक्षी सुकुमारन

      नोएडा