भाई

ज़िन्दगी की तेज़ धूप में, 

घनी छाँव होता है भाई।

माँ-बाप की ताकत...

बहन का गुरुर...

राखी की लाज... 

मायके की रौनक... 

उम्र में चाहे छोटा हो,

पिता-तुल्य होता है भाई। 

ज़िन्दगी की तेज़ धूप में, 

घनी छाँव होता है भाई।

सर्वोत्तम सलाहकार...

घनिष्ठतम मित्र... 

सर्वदा शुभचिंतक... 

निःस्वार्थ, निश्छल... 

देख बहन के आँसू, 

दिल से रोता है भाई। 

ज़िन्दगी की तेज़ धूप में, 

घनी छाँव होता है भाई।

हवा से भी चंचल...

जल से भी शीतल...

पर्वत से भी मज़बूत... 

समुद्र से भी गहरा... 

उर में अपने निर्मल,

प्रेम-गंगा संजोता है भाई। 

ज़िन्दगी की तेज़ धूप में, 

घनी छाँव होता है भाई।

तू फिक्र मत कर...

तेरा भाई है ना...

मुझसे ना छुपा... 

हर बात तू बता...

यह सब कहने वाला,

हमराज़ होता है भाई। 

ज़िन्दगी की तेज़ धूप में, 

घनी छाँव होता है भाई।

ग़मो की दवा... 

ख़ुशी की चाबी... 

चेहरे की ख़ुशी... 

आँखों की ठंडक...

बहन के लिए अनमोल, 

एक उपहार होता है भाई।

ज़िन्दगी की तेज़ धूप में, 

घनी छाँव होता है भाई।


दीप्ति खुराना,शिक्षिका व कवयित्री

मुरादाबाद-उत्तर प्रदेश