प्रदेश में बढ़ती देश विरोधी गतिविधियों से संघ परिवार भी नाराज

भोपाल। देश विरोधी हरकतें और लव जिहाद के बढ़ते मामलों के कारण संघ परिवार भी सरकार की कथित ढिलाई से नाराज है। विशेष रूप से अफसराशाही जिस तरह से इन मामलों से निपट रही हो उससे भी संघ परिवार के कार्यकर्ताओं का गुस्सा बढ़ रहा है। इसे देखते हुए कानून और व्यवस्था का मोर्चा खुद मुख्यमत्री शिवराज सिंह चौहान ने संभाल लिया है। उन्होंने गत दिवस इंदौर में अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी। इस संबंध में ठोस योजना तैयार की जा रही है तथा कोशिश की जाएगी कि देश विरोधी तत्वों को सख्ती से दबाया जाए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस तरह से देश विरोधी तत्वों से निपटते हैं उसकी मिसालें भी संघ परिवार लगातार देता है। सूत्रों के अनुसार संघ परिवार का मुख्यमंत्री पर दबाव है इस कारण से सरकार आने वाले दिनों में तेवर दिखाएगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यख कमलनाथ ने एकाएक आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस कार्यकर्ता भी जोश में आ गए हैं और सरकार के खिलाफ विभिन्न मामलों में उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इंदौर में जिस तरह से कांगे्रेस का धरना प्रदर्शन सफल रहा उसी तर्ज पर प्रदेश मे अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन करने की योजना है। कांग्रेस ने जन आशीर्वाद यात्रा को अनुमति देने और धार्मिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने को भी मुद्दा बनाया है। इदौर में पहली बार कांग्रेस के प्रदर्शन में भगवा झंडे देखे गए। कांग्रेस कार्यालय केक बाहर भगवान श्रीराम के फोटो भी नजर आने लगे हैं। कांग्रेस साफ तौर पर भाजपा को हिंदुत्व के एजेंडे पर घेरने में लगी हुई है। प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ पहले से ही इस कोशिश में रहते हैं कि हिंदुत्व का मुद्दा केवल भाजपा के पास ना रह जाए। इसके अलावा कांग्रेस ने महंगाई और कानून व्यवस्था को भी मुद्दा बनाना प्रारंभ कर दिया है। किसानों के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरने की कोशिश की जा रही है। गुजरात के नेता हार्दिक पटेल को मध्यप्रदेश बुलाने की योजना है। इतना ही नहीं कमलनाथ ने महंगाई भत्ता ना देने के मामले में सरकार की आलोचना कर और पूर्व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकारी कर्मचारियों को भड़काने का काम भी किया है। 2003 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में जिस तरह से कांगे्रेस की पराजय हुई थी उसके बाद से कांग्रेस को सरकारी कर्मचारयिों का महत्व समझ में आ गया है। कमलनाथ ने अपने शासनकाल में भी कर्मचारियों के हितों में कई निर्णय लिए थे। उप चुनाव को देखते हुए कमलनाथ के तेवर और अधिक आक्रामक हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार कमलनाथ ने सभी नेताओं से कहा है कि वे मैदान में नजर आए। प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ खुद भी संभागीय बैठकों की योजना बना रहे हैं ताकि मैदान में जाकर फीडबैक लिया जा सके। कांग्रेस के नेताओं में नाराजगी ना हो इस कारण से उन्होंने प्रदेश कांग्रेस का बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित फेरबदल भी टाल दिया है। कांग्रेस के आक्रामक रवैया के कारण भाजपा इन दिनों रक्षात्मक नजर आ रही है। प्रदेश में करीब 20 फीसदी आबादी आदिवासियों की है। मालवा निमाड़ में आदिवासी मतदाताओं की संख्या प्रभावी स्थिति में है। खंडवा लोकसभा तथा जोबट विधानसभा में आदिवासी मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। मालवा निमाड़ में जिस तरह से जयस का असंतुष्ट गुट तेजी से पैर पसार रहा है और उससे कांग्रेस चिंतित हो गई है। क्योंकि यदि जयस के असंतुष्ट गुट का प्रभाव फैला तो उसका नुकसान कांग्रेस को होगा। इसी दृष्टि से कांग्रेस में आदिवासियों में अपना नेटवर्क मजबूत करना प्रारंभ कर दिया है। निमाड़ में आदिवासी आंदोलन का जिम्मा रवि जोशी को दिया गया है। रवि जोशी के नेतृत्व में ही बड़वानी से कांग्रेस की यात्रा निकाली जा रही है जो आदिवासियों को बाएगी कि कांग्रेस उनकी कितनी हितेशी है और भाजपा कितनी विरोधी। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को आदिवासी मतों के कारण ही सत्ता मिल सकी थी इस कारण से वह आदिवासियों का राजनीतिक महत्व समझती है।