बहादुर बेटियां

पिता ने देश की खातिर,अपना लहु बहाया।

प्राणो की आहुति देकर, तिरंगे को कफन बनाया।।


मेरी बेटियों वीर सिपाही बनना,मेरी यही कामना।

तिरंगे को ना झुकने देना, तिरंगे का मान रखना।।


दोनों बेटियों ने छोड़ दिया,गुड़िया गुड्डो से खेलना।

बन गई वीर सिपाही, मां का हृदय अब कांप गया।।


मां क्यों घबराती हो,तुम्हारी बहादुर बेटियां है हम।

हमारे बाजुओं मे है दम,हौसले नही किसी से कम।।


दुश्मनों को मार भगाएंगे,युवाओं का मिसाल बन जाएंगे।

कतरा-कतरा लहु बहाएंगे,देश की माटी का तिलक लगाएंगे।।


भारत का परचम लहराएंगे,शान से तिरंगा फहराएंगे।

मां तेरा नाम रोशन कर जाएंगे,आंचल मे आकर सो जाएंगे।।


प्रियंका पांडेय त्रिपाठी