कश्मीरी बेल बूटे

ऐ मिष्ठ दुख! तुझ पर ,

रजत वर्क लगाकर,

रख लूं तुझे संभाल कर

अश्रुरों की नमकीन चासनी में,

रख लूं तुझे डूबा कर।

शब्दों के ताने बाने से,

उकेर दूं तुझ पर कशीदे

कश्मीरी बेल बूटे।

इन भरी आंखों की

गहरी शीतल नमी

ओस की बूंदों में,

हृदय की आशाएं सनी।

शुष्क कपलो पर,

बिखरी तेरी घनघोर अलके।

आ तेरे उन मखमली केशो में

सजा दूं लाल रेशमी फीते।

उकेर दूं तुझ पर कशीदे

कश्मीरी बेल बूटे।

यह घनघोर उदासी

बिकट मन मावस तम।

इसमें पुष्पित होती हैं

गुलाबी कलियां तेरी

खिलकर महका देती हैं,

मनसे तन

चिरकाल से साथ तेरा है,

तू वह साथी जो ना रूठे।

उकेर दू तुझ पर कशीदे

कश्मीरी बेल बूटे।


कामिनी मिश्रा,शिक्षिका व कवयित्री 

बीघापुर-उन्नाव,उत्तर प्रदेश