स्त्री जीवन

सुबह क्या खाना बनाएगी यह सोच में कब उसकी आंख लग गई पता नहीं चला। थकी हुई जो थी।वैसे एक स्त्री ही एक साथ इतने काम संभाल सकती हैं।बच्चों के सारे काम,टिफिन बनाना,कपड़े तैयार करना,सब की पसंद को ध्यान में ले खाना बनाना,सभी रिश्तों को निब्बाहना,और क्या क्या नहीं,लिखने से भी खत्म न होगी तहरीर।पति की पसंद नापसंद, सास ससुर का मान सम्मान और सेवा,दवाई का समय,दवाई को मंगवाना सब उसकी गिनती में रहता हैं तो क्या स्त्री को हम क्या उपाधि देंगे? सर्व व्यापी!

कुछ दिन पहले ये कही पढ़ा था,एक औरत को यमदूत लेने आए,तो उसने पूछा कहां ले चले हो मुझे? उत्तर सुन सन्न रह गई और बोली हमेशा के लिए लिये जा रहे हो तो कृपया मुझे २४ घंटो का समय दें ।

यमदूत ने कहा कि अभी भी जिजीविषा हैं लेकिन समय पूरा हो गया हैं तो चलना तो पड़ेगा।

उसने बताया कि दूसरे दिन वही समय उसे लेने आयेंगे तो ही वह साथ जायेगी।कुतुहल वश यमदूत ने पूछा कि ऐसी क्या वजह थी कि वह समय मांग रही थी? तब उसने बताया कि उसके घर में मेहमान आने वाले थे तो बहुत सारा खाना बनाएगी,सभी  अलमारियां उलट  सुलट थी उसे जमाना था,काल ही उसके बेटे ने पूड़ी खाने की इच्छा जाहिर की थी तो वह भी बना देगी।मलाई से भरा पतीला फ्रिज में पड़ा था तो उसमें से मक्खन निकल घी भी बनाना था।बच्चो के कपड़े और यूनिफॉर्म भी इस्त्री करना था। बच्चों के बाल कटवाने हैं ताकि जब वह नहीं होगी तो खुद से बना सके।थोड़ा राशन भी लाके रखना था सब की सुविधा के लिए।

तब यमदूत को प्रश्न हुआ ये हैं कौन,और पूछ ही लिया, कि उनकी पहचान क्या थी?

 "तब वह बोली मैं स्त्री हूं,मैं मां हूं ,मेरे बहुत सारे फर्ज हैं उनको पूरे करे बिना कैसे आ सकती हूं तुम्हारे साथ."

यमदूत बोला ," क्षमा करना हे स्त्री, हे माता,हम यम लोक वासी तो सिर्फ घूमती फिरती काया को ही समझते हैं,ये प्यार और दरकार से हमारा कोई सरोकार नहीं होता। प्यार और प्रेम की भाषा हम नहीं जानते।आप अपना फर्ज निबाहो मैं किसी मास्क बगैर वाले को ले लूंगा,खुश रहो" और जल्दी से वहसे

 यमदूत चला गया ,शायद अपने आंखो के अश्रु छिपाने।

और एक स्त्री ,एक मां जीत गई। 


जयश्री बिर्मी

निवृत्त शिक्षिका

अहमदाबाद