चुप बैठे हैं सब

     क्या मजबूरी है उनकी

     या है  कोई लाचारी

     कट्टरता की आँधी चल रही है

     चारों ओर कोहराम 

     नहीं दिखता कहीं विराम

     पर चुप हैं सब

     कभी आतंकवाद को

     जड़ से मिटाने वाले

     आज खुद को बचा रहे हैं

     भोलीभाली जनता का खून

     पानी की तरह बहा रहे हैं

     बेख़बर की तरह देख रहे हैं सब

 विश्व मानवाधिकार के सूत्रधार

 क्या सो रहे हैं आज

 या मर चुकी है उनकी अंतरात्मा 

 या कर दिया है आत्म समर्पण

 आतंकवाद के सामने पर समझ लो

 अगला नंबर किसका है?

 पता नहीं आपका या आपके पड़ोसी का?

 सर्तक रहें ! जागरूक रहें ! 

 विरोध करे किसी भी तरह के

 कट्टरवाद और कट्टरपंथ का

 नहीं तो मरती रहेगी भोलीभाली जनता

 मौन होकर देखते रहेगें सब

 मिटती रहेगी उनकी पहचान 

 इतिहास में लिखा जायेगा

  क्या एक था 

  अफगानिस्तान?

 

 डॉ. मनोज कुमार

नई दिल्ली