दीपक क्रांति को शिक्षक दिवस पर ग्लोबल एजुकेटर अवॉर्ड 202

गुमला झारखंड निवासी कवि ,लेखक शिक्षक - शिक्षाविद् दीपक क्रांति को उनकी शैक्षणिक व साहित्यिक सामाजिक सक्रियता व विश्वस्तरीय योगदान के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल एजुकेटर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।यह सम्मान विलक्षण प्रतिभाओं के धनी दीपक क्रांति को अंतरराष्ट्रीय संस्था विलक्षणा एक सार्थक पहल ,हरियाणा द्वारा आयोजित स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग दयानंद महाविद्यालय ,अजमेर के एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में दिया जाएगा।यह सम्मान 5 सितम्बर शिक्षक दिवस के मौके पर उन्हें दिया जाएगा।

अजमेर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान लगान,अपहरण ,आरक्षण,गंगाजल जैसे प्रसिद्ध फिल्मों  के प्रसिद्ध व प्रबुद्ध अभिनेता श्री यशपाल शर्मा के हाथों दिया जाएगा। इस अवसर पर महावीर गुड्डू(क्षेत्रीय अतिरिक्त निदेशक,हरियाणा,कला परिषद),डॉ. लक्ष्मीकांत शर्मा,भैरू सिंह राजपुरोहित,डॉ. नरेश आदि सहित देश के प्रसिद्व शिक्षकगण उपस्थित समेत कई राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बुद्धिजीवी उपस्थित रहेंगे।

 हरियाणा व भारत सरकार द्वारा पंजीकृत इस संस्था की संस्थापक डॉक्टर सुलक्षणा व महासचिव डॉक्टर विकास ने बताया कि दीपक क्रांति यह सम्मान पाने वाले अपने गृह राज्य झारखंड - बिहार से व अपने कर्मभूमि तमिलनाडू से एकमात्र शिक्षक हैं,दीपक ने शिक्षा में सुधार के लिए अनेक अद्भुत कार्य किए हैं,उनकी बनाई हुई ' दी क्रांति टीचिंग मेथड ' जो ओशो के ध्यान और दीपक जी के शिक्षण ज्ञान व प्रतिभा का अद्भुत सम्मिश्रण है,देश के लिए अत्यंत कारगर है,जिसमें शिक्षा में साहित्य - संगीत - कला को अनिवार्य माना गया है। 

अभी हाल ही में दीपक क्रांति को इंडिया के  बेस्ट टीचर का नेशनल अवॉर्ड मिला है,इसके अलावा शिक्षा के लिए कार्यरत राष्ट्रीय संस्था बालरक्षक पंजीकृत (भारत सरकार) द्वारा सावित्रीबाई फुले शिक्षक दर्पण राष्ट्रीय पुरस्कार, ब्रज लोक साहित्य कला अकादेमी आगरा द्वारा ज्ञान - दीपक राष्ट्रीय सम्मान, एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में देशभक्ति हेतु नाम चयन आदि पिछले कुछ ही दिनों के अंतराल में मिले हैं,साथ ही उन्हें इस वर्ष भारतीय दलित साहित्य अकादेमी का झारखंड सचिव के पद से भी विभूषित किया गया है।

विदित हो कि इससे पूर्व भी दीपक को दो - दो दलित साहित्य अकादेमी पुरस्कार,राष्ट्रपति पुरस्कार ,राष्ट्रीय  युवा रत्न सम्मान और देश विदेश से 300 से अधिक कई सम्मान मिल चुके हैं।झारखंड के  हार्डकोर नक्सल प्रभावित लातेहार जिले  के लुकुईया बोदा जंगलों में अपना बचपन गुजारने वाले दीपक की प्रतिभा उसी समय से लोगों ने जान लिया था जब सातवीं कक्षा में फेल होने के बाद अगले साल पूरे विद्यालय में टॉपर बन के उन्होंने दिखाया था।इसके अलावा बचपन से ही उन्हें कविता लिखने और पढ़ाने का जुनून रहा है।

अपनी पढ़ाई उन्होंने कोचिंग पढ़ा के किया ,जिसमें गरीब बच्चों को वे निःशुल्क पढ़ाते थे,और आज उनके पढ़ाए सैकड़ों बच्चे सरकारी व अन्य संस्थानों में कार्यरत हैं..उन्होंने 4 विषयों के साथ मास्टर डिग्री , हिंदी व संस्कृत अलग अलग शिक्षण विषयों के साथ दो बी एड डिग्री ,मास कॉम में मास्टर डिग्री,2 नेट,4 बार सीटेट , एम फिल समेत पढ़ाई का एक नया रिकॉर्ड अपनी मेहनत से कायम किया,आज भी देश में सबसे शिक्षित बनने के लक्ष्य के साथ आगे पी एच डी हेतु पढ़ रहे हैं..साथ ही परमाणु ऊर्जा विभाग भारत सरकार  में हिंदी - संस्कृत शिक्षक सह राजभाषा प्रभारी के रूप में तमिलनाडू में कार्यरत हैं।

उनकी पढ़ाने की शैली बिल्कुल भिन्न है,जिसमें वह अपने विषय को तल्लीन होकर नाटकीय भाव से,कभी अलग अलग फिल्मी सितारों और गायकों की मिमिक्री कर के,तो कभी पूरे पाठ को कविता में ढाल के पढ़ाते हैं,जिनसे बच्चे उनके प्रशंसक हो जाते हैं और  बेहद रुचि के साथ पढ़ते हैं।पढ़ाई को बोझिल न बनाकर साहित्य संगीत और कला के साथ अद्भुत ढंग से प्रस्तुतीकरण के कारण व कई शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर उन्हें यह नेशनल अवॉर्ड मिला,जिसने देश से लगभग 45 प्रोफेसर और शिक्षक शामिल हैं,और हिंदी - संस्कृत विषय में सिर्फ दीपक क्रांति उर्फ दीपक कुमार चौधरी शामिल हैं।

 दीपक क्रांति साहित्यिक शैक्षणिक संस्था  बदलाव मंच( रजी) के ग्लोबल फाउंडर भी हैं,जिसके द्वारा राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक शैक्षणिक गतिविधियां चलाते हैं और झारखंड में गरीब बच्चों के लिए भाई रूपक क्रांति के सहयोग से निःशुल्क विद्यालय बदलाव शिक्षा संस्थान भी संचालित कर रहे हैं,जिसे पूरे देश में गरीब बच्चों के लिए संचालित करने पर आगे कार्य कर रहे हैं । साथ ही हर विषय की शिक्षा को जीवन और साहित्य संगीत से जोड़कर पढ़ाने और ' शिक्षा साहित्य - संगीत के साथ ' की विधि हर जगह वाह प्रसारित करना चाहते हैं,ताकि मनोवैज्ञानिक रूप से भी विद्यार्थी पढ़ाई से प्यार करना सीखें,बोझिल न समझें।

अभी तक लगभग 12 सरकारी व गैर सरकारी स्कूल कॉलेजों में अल्पकाल के लिए अध्यापन कर  चुके,और जर्मनी अमेरिका,ओमान समेत कई देश के लोगों की हिंदी की कक्षा ले चुके शिक्षा के अनुभवी दीपक क्रांति की इस अद्भुत उपलब्धि पर उनके नाना नानी, माँ,  भाई रूपक क्रांति ,बदलाव मंच महिला अध्यक्ष रूपा व्यास,रूपेश कुमार,शैलेन्द्र पायासी,चन्द्र प्रकाश गुप्त,भास्कर सिंह माणिक,सुनील दत्त मिश्रा,गीता पांडेय,जीत पांडेय,वैज्ञानिक अधिकारी गौतम आनंद,गायक विपिन कुमार,समाजसेवी पी सी कटारिया,विनीत कुमार, मित्र राहुल गुप्ता,मुबारक आलम, निशांत गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, जितेंद्र हिरवानी, राखी राजपूत,अनु,शिक्षक महेंद्र प्रजापति,इम्तियाज़ आलम, अजय पांडेय,गौरांग महाप्रभु,सुल्तान अंसारी,बासुकीनाथ, एस रघु ,प्रिंसिपल विकास कांबले, उप प्रधानाचार्या स्वर्णा  रानी, एस अनिल कुमार माया देवी, वरलक्ष्मी मैमा,नलिनी,मोहन राज, डी सीतारमन, मोहन चौधरी,गुरुसामी,शीजा,गुरुचरण,अर्जुन,रोहित पटेल,आबिद खान, संजीत,अखिलेश ,सूर्यदेव साहू,समेत  अनेक  शिक्षकों और उनके विद्यार्थियों ने हर्ष व्यक्त किया है ।बदलाव मंच की नंदिता रवि चौहान, एल एस तोमर ,नैंसी गुप्ता,शिव प्रकाश, प्रकाश मधुबनी,डॉ रेखा मंडलोई,मलकप्पा महेश, डॉ  सत्यम भास्कर, सबीना नाग,मनीष वर्मा, अर्चना फौजदार, रीमा सिंह,डॉक्टर अर्पिता,ओम श्रीवास्तव आदि सभी ने बधाइयाँ दी हैं । यह जानकारी उनके संस्था के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र पयासी ने दी।