सुलभ एवं सस्ता न्याय सब के लिये : सचिव

बहराइच । मा. उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार मा. अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में श्रीमती शिखा यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्षता में एडीआर भवन, मध्यस्थता एवं सुलह-समझौता केन्द्र में जागरुकता, साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि श्रीमती यादव, मध्यस्थ अधिवक्तागण अमित खरे व अश्वनी कुमार मिश्रा, कर्मचारीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बहराइच एवं वादकारीगण उपस्थित रहे।

सचिव महोदया द्वारा शिविर में उपस्थित वादकारियों को मध्यस्थता एवं सुलह-समझौता की प्रक्रिया के बारे में बताया गया कि त्वरित, सस्ता, सुलभ न्याय प्रत्येक भारतीय का नैतिक अधिकार है। ऐसे सभी व्यक्ति जिनका मुकदमा न्यायालय में लंबित है, वे कोर्ट-कचेहरी के चक्कर लगाने की जगह अपने मुकदमे का निस्तारण आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित कराये। सुलह-समझौते की प्रक्रिया निःशुल्क है। वादकारीगण अपने आस-पास के क्षेत्रों में लोगों को सुलह-समझौता के लिये जागरुक करें। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि सुलह-समझौते से मुकदमें का निस्तारण कराने से पक्षकारों के बीच परस्पर तनाव की संभावना भी कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त उनकी कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है। सुलह वार्ता की प्रक्रिया में पक्षकारों द्वारा बतायी गयी बातों को बिल्कुल गोपनीय रखा जाता है। साथ ही ऐसे व्यक्ति जो आर्थिक रुप से कमजोर है एवं अपने मुकदमे की पैरवी करने में अक्षम हैं, उन्हे नियमानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता प्रदान किये जाने के बारे में बताया गया।

श्री खरे, मध्यस्थ अधिवक्ता द्वारा बताया गया कि मध्यस्थता एवं सुलह-समझौता केन्द्र में सुलह-समझौता हेतु न्यायालय द्वारा संदर्भित पत्रावलियों की समयावधि 3 महीने तक होती है। सुलह-समझौता केन्द्र में सुलह हेतु दोनों पक्षकारों को आमने-सामने बैठाकर वार्ता करायी जाती है, जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ता की कोई आवश्यकता नहीं होती है। सुलह-समझौते में कोर्ट की फीस एवं अधिवक्ता की फीस नही पड़ती है।