मन की खुशियां

हर क्षण ये मन, 

खुश होना चाहे, 

दुख की बारिश हो या, 

सुख की बरसात यहां, 

बादल घने हो या, 

कठिन हो हालात यहां, 

हम पाना चाहे, 

मन की खुशियां।

मन की खुशियों से, 

संसार सुंदर दिखे, 

मन की खुशियों से, 

हर कोई अपना लगे, 

न बनाएं यहां दूरियां, 

दूरियां छीन लेती है खुशियां, 

इक दूजे का दर्द बांटे, 

बांटे मन की खुशियां।

तूफान तो आता ही है, 

लड़ते हैं हम मगर, 

कांटे तो चुभते ही हैं, 

दर्द को सहते हैं मगर, 

इक दूजे के मन की जाने, 

गलत नहीं हर कोई यहां, 

कौन किस पथ से गुजरा है,  

कोई समझ सका कहां, 

बांटे मन की खुशियां।

न हम अपेक्षा करें, 

न हम उपेक्षा करें, 

अपने मन को खुश रख कर, 

खुशी सबको हम बांटे। 

मनभावन रहे जैसे, 

उड़ती तितलियां, 

इत उत बैठे फूलों पर, 

खुशी व्यक्त करें यहां, 

क्यों हम भी दुखी रहे यहां, 

न रहे कोई दुखिया, 

सबको मिले यहाँ, 

मन की खुशियाँ । 


स्वरचित- अनामिका मिश्रा

झारखंड, सरायकेला (जमशेदपुर)