प्रसाद मेडिकल में छात्रों से अमानवीय व्यवहार, प्रशासन मौन

लखनऊ। एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने प्रसाद इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ द्वारा की जा रही गंभीर अनियमितताओं तथा उत्पीड़न की जाँच की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य को भेजी अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि शासन ने प्रदेश के 24 मेडिकल कॉलेज तथा 19 डेंटल कॉलेज के लिए शैक्षिक वर्ष 2020-21 हेतु शुल्क का निर्धारण किया गया. इसमें प्रसाद इंस्टिट्यूट हेतु रु० 10.84 प्रति छात्र,प्रति वर्ष का शैक्षणिक शुल्क, रु० 1.5 लाख का हॉस्टल शुल्क, रु० 3.0 लाख सिक्यूरिटी डिपाजिट तथा रु० 0.80 लाख विविध शुल्क निर्धारित किया गया. इस प्रकार प्रथम वर्ष हेतु रु० 16.14 लाख, अन्य वर्षों हेतु रु० 13.14 लाख तथा अंतिम वर्ष हेतु रु० 6.57 लाख का शुल्क निर्धारित किया गया. इसके विपरीत प्रसाद इंस्टिट्यूट ने वर्ष 2020-21 हेतु प्रवेश लिए छात्रों से रु० 2.90 लाख का अतिरिक्त शुल्क माँगा. साथ ही सभी छात्रों से आगामी वर्षों के फीस के पोस्ट-डेटेड चेक भी मांग कर रख लिए हैं, जो निर्धारित शुल्क से बहुत अधिक हैं। नूतन के अनुसार जिन लोगों ने अतिरिक्त शुल्क नहीं दिया है, उनके साथ अत्यंत अमानवीय व्यवहार हो रहा है, जिसमे गन्दा खाना देना, शौचालय आदि की बुनियादी सुविधा नहीं देना भी शामिल हैं. छात्रों ने इसकी कई बार शिकायत की किन्तु विभागीय अफसर इन्हें पूरी तरह नजरंदाज कर रहे हैं। नूतन ने इन तथ्यों की जाँच कराते हुए प्रसाद इंस्टिट्यूट की मान्यता निरस्त करने, अतिरिक्त फीस वापस करने तथा सभी छात्रों को अविलंब मूलभूत सुविधा देने की मांग की है।