॥ आजादी अधुरी है ॥

सिन्ध पे दुश्मन का कब्जा है

अभी आजादी अधुरी है

निकलो घर से वीर जवानों

सिन्ध पी ओ के की अब बारी है


अभी गरीबी गले पड़ी है

अभी आजादी अधुरी है

किसानों अभी चैन से ना बैठो

स्वाबलंबन बनाने की तेरी बारी है


भ्रष्टाचार सिरमोर बना है

अभी आजादी अधुरी है

भारत के कानून आँखें खोलो

रिश्वतखोर की सजा की बारी है


अशिक्षा बना कलंक का चन्दन

अभी आजादी अधुरी है

विद्वजनों आगे अब आयें

शिक्षा दान की बारी है


अपराध राजनीति में भाई भाई

अभी आजादी अधुरी है

ओ भारतीय ईमानदार मतदाता

अब सुधार की तेरी पारी है


धर्मान्तरण जेहाद बनी है

अभी आजादी अधुरी है

संभल जा रे धर्म के ठेकेदार

कानून से सबक सिखाने की बारी है


नक्सलबाद दे रही चुनौती

अभी आजादी अधुरी है

हे राष्ट्रभक्त देश की जनता

बेनकाब करने की तेरी पारी है


अलगावबाद बना देश की दुश्मन

अभी आजादी अधुरी है

खतरा भारत में खुले घूम रहा है

अब कचरे की सफाई जरूरी है


भूख से तड़पे घर का बच्चा

अभी आजादी अधुरी है

कुपोषण को जड़ से मिटावो

बचपन बचाने की अब बारी है


बाल मजदूर कलंक माथे पर

अभी आजादी अधुरी है

अय देश के बुद्धिजीवी

कलंक मिटाना जरूरी है ।


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088