मेघ आए बड़े बन-ठन के

देने तपती जलती गरमी से

राहत

छम छम मेघ आए बड़े बन-ठन के

मिटी प्यास आग उगलती धरा की

खिले खेत खलिहान

महके फूल पत्ते भी पाकर स्पर्श बरखा

 की मचलती बूंदों का

क्या बच्चे  क्या बड़े सब चहक उठे देख 

रिमझिम फुहार

यूँ बिखेर छटा मनोहारी

और लेकर मुस्कान हर चेहरे पर मेघ 

आए बड़े बन-ठन के

महकी खुशबू पकवानों की

चाय की चुस्की के साथ

वहीं सौंधी सौंधी महक मिट्टी

 की घुली हवाओं में 

हर दिल यूँ झूम रहा हो 

मदमस्त रिमझिम मौसम में

मेघ आए बड़े बन-ठन के 

यूँ लेकर खुशियों भर भर के

होंगे शुरू अब सब तीज त्योहार

खनके की चूड़ी महके की मेहंदी

पड़ेंगे झूले डाली डाली

मेघ आए बड़े बन-ठन के

लेकर यूँ मुस्कान मीठी सी

हर बहन हर सुहागन के मुख पर

मिठास संग घुलेगी रीत और प्रीत

मेघ आए बड़े बन-ठन के बन 

लेकर पैगाम यूँ खुशियों के जब मिलेगी भाई से बहना सजना से सजनी बंधे प्रीत की डोर से ।।


.....मीनाक्षी सुकुमारन

       नोएडा